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डाउनलोड करेंरोहडू. बडैओं में शार्ट सर्किट से निकली एक चिंगारी ने25 परिवारों के सपनों के आशियानों को चंद घंटों में राख के ढेर में तबदील कर दिया। कल शाम तक अपने इन आशियानों को और सजाने संवारने व सुख सुविधाओं से लैस करने के सपने देख रहे ये परिवार आज मलबे को देखकर सदमे में है।
क्षेत्र में लकड़ी के मकानों के जलने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी अपर शिमला के दर्जनों गांव में काठकूणी शैली में बने लकड़ी के मकानों में आग का कहर बरपा है। बावजूद इसके न तसे सरकार ने इन मकानों को आग से बचाने के लिए ग्रामीण स्तर पर कोई प्रयास किए हैं और न ही क्षेत्रवासियों ने इन अग्निकांडों से कोई सबक लिया है। हर साल क्षेत्र में आग करोड़ों रूपए की संपत्ति को लील रही है। इसकी मुख्य वजह शार्ट सर्किट होती है। लकड़ी के मकानों के लिए घातक साबित हो रही शार्ट सर्किट को रोकने के लिए न तो विद्युत विभाग मकानों में मीटर लगाने के दौरान जांच करता है और न ही क्षेत्रवासी अपने मकानों की सुरक्षा के ठोस उपाय करते हैं। इतना ही नहीं क्षेत्र में बने अधिकांश मकानों की इंश्योरेंस तक नहीं की गई है।
ऐसे हादसों से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर किए गए इंतजामों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने प्रदेश भर में मात्र 15 अग्निशमन केंद्र स्थापित कर रखे हैं। भगौलिक दृष्टि से दुर्गम अप्पर शिमला के चौपाल व जुब्बल कोटखाई क्षेत्र में एक भी अग्नि शमन केंद्र स्थापित नहीं किया गया। परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में जब भी आग लगने के हादसे हुए तब या तो कई किलोमिटर दूर रोहडू व ठियोग से अग्निशमन दलों को बुलाया जाता है। करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इन अग्निशमन दलों से फायर टेंडर के पंहुचने से पहले ही आग की लपटें ग्रामीणों की जीवन भर की संपत्ति लील चुकी होती है।
बडैओं निवासी प्रताप, संतराम ठाकुर जस्टा सहित अन्य अग्निपीडितों का कहना है कि उनके जीवन भर की पूजी आग में स्वाह हो चुकी है। उनका कहना है कि नहीं सोचा था शार्ट सर्किट से निकली एक चिंगारी उनकी जिंदगी को धुआं धुआं कर देगी। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार को ऐसी घटनाओ को रोकने के लिए दुर्गम क्षेत्रों में अग्निशमन केंद्र स्थापित करने चाहिए और प्रभावित परिवारों को होने वाले नुक्सान को दखते हुए रिलीफ मैनुयल में बदलाव कर राहत राशि को बढ़ाने व होम इंशोरेंस को आवश्यक करने जैसे कदम उठाने चाहिए।
अपर शिमला के अब तक के बड़े हादसे
अपर शिमला में अब तक घटित हुए बडे अनिकाडों में गुम्मा, खडापत्थर, बटाड, खांगटा, टिक्कर, जांगला, करछारी, बदशाल, चिचवाडी व बठवा गांव आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए थे। इन अगिनकाडों में करोडों रूपा की संपति नष्ट हुई थी। इन सभी अगिनकाडों की वजह शाट सर्किट रही है।
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