200 रुपए में चैक होगा सर्टिफिकेट
यशपाल कपूर - सोलन
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी वर्गों के कर्मचारियों के लिए अपने मूल दस्तावेजों की वैरीफिकेशन करवाना अनिवार्य बनाया गया है। कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच करना तो ठीक है, लेकिन दस्तावेजों की वैरीफिकेशन की एवज में वसूले जा रहे भारी शुल्क को लेकर कर्मचारियों की भौहें तन गई है।
शिक्षा विभाग के कर्मचारी विभाग के इस फरमान को अनुचित मान रहे हैं। दस्तावेजों की वैरीफिकेशन की एवज में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 200 रुपए प्रति दस्तावेज शुल्क की मांग की है। प्रदेश के जिन कर्मचारियों ने बोर्ड से 4 या 5 सर्टीफिकेट की वैरीफिकेशन करवानी है तो उसको तो 1000 रुपए
चुकाना होगा।
क्या है सरकारी फरमान
हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय ने पत्र संख्या ईडीएन-एच ((21))13 ((15))70/२१२ के तहत उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 29 नवंबर 13 को जारी किया है। इसके अनुसार शिक्षा विभाग में कार्यरत 80 हजार कर्मचारियों को अपने मूल दस्तावेजों की वैरीफिकेशन करवानी होगी। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी की सर्विस बुक तबी अपडेट होगी, जब कर्मचारी के प्रमाणपत्रों की वैरीफिकेशन
हो जाएगी।
कर्मियों पर पड़ेगा 80 करोड़ का बोझ: संघ
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने शिक्षा विभाग की ओर से दस्तावेजों की वैरीफिकेशन और इसकी एवज में वसूले जा रहे बोर्ड के शुल्क को अनुचित ठहराया। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरोत्तम ठाकुर, महासचिव राजेंद्र ठाकुर और मीडिया प्रभारी डॉ. रामगोपाल शर्मा ने इस फरमान को आर्थिक हानि वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के 80 हजार कर्मचारियों पर करीब 8 करोड़ का अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हित में कोई निर्णय लिया जाए, ताकि अनावश्यक एक्सरसाइज से बचा जा सकें। संघ ने प्रदेश सरकार, शिक्षा विभाग, बोर्ड एवं यूनिवर्सिटी प्रशासन से मांग की है कि दस्तावेजों की वैरीफिकेशन निशुल्क हो या दस्तावेजों की ऑनलाइन वैरीफिकेशन की जाए। संघ शीघ्र ही इस मामले में बैठक कर विभाग के उच्चाधिकारियों से मिलेगा।