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एक ही साल में खराब हो गए पानी के मीटर

7 वर्ष पहले
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मोहन चौहान - सोलन
आईपीएच के करीब २५ करोड़ रुपए के एरियर बिल को कम करने के लिए नगर परिषद ने शहर में घरेलू व व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए पानी का नया मीटर लगाना जरूरी किया है। नगर परिषद की यह योजना यहां कारगर साबित नहीं हुई है। नप के निर्देश पर उपभोक्ताओं ने आनन-फानन में बिना गारंटी के मीटर लगा तो दिए, लेकिन यह एक साल के अंदर की जवाब दे गए।
मीटर खराब होने के कारण नगर परिषद को फिर से उपभोक्ताओं को औसत बिल देना पड़ रहा है। इसके चलते उपभोक्ताओं को पानी की कंजंपशन के मुताबिक बिल जारी करना मुश्किल हो गया है। नगर परिषद अब एक वर्ष के औसत बिल के हिसाब से ही बिल जारी कर रही है। नप के निर्देश पर शहर में करीब पांच हजार उपभोक्ताओं ने नए मीटर लगाए हैं। इसमें से ८० फीसदी मीटर बिना गारंटी के लगे हैं। यही कारण है कि ४० फीसदी मीटर एक वर्ष के अंदर की खराब हो गए। उपभोक्ताओं ने साल भर पहले ८०० से १००० रुपए खर्च कर नए मीटर लगाए थे। बहरहाल, बिल के घाटे को कम करने के लिए नगर परिषद शहर में प्रमाणित कंपनी व गारंटी वाले मीटर लगाने का निर्णय ले सकती है। मीटर खराबी को ठीक करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों की ऑउट सोर्सिंग भी संभव है।



॥उपभोक्ताओं को खराब मीटर की जगह नए मीटर लगाने के निर्देश हैं। खराब मीटर वाले उपभोक्ताओं से औसत बिल ही वूसले जा रहे हैं। डेड मीटर की मरम्मत के लिए फिलहाल तकनीकी कर्मचारी का पद सृजित नहीं है।

बीआर नेगी, नगर परिषद, सोलन

नप पर हर महीने बढ़ रही छह लाख की देनदारी

नगर परिषद पर एरियल बिल के रूप में आईपीएच की करीब २५ करोड़ रुपए की देनदारियां हो चुकी है। शहर के करीब १० हजार घरेलू व व्यवसायिक उपभोक्ताओं से नगर परिषद महीने में १३ से १४ लाख रुपए की ही बिल के रूप में वूसल पाती है। नगर परिषद को आईपीएच से १७.२० पैसे प्रति १ हजार लीटर पानी के हिसाब से बिल मिल रहा है, जबकि नप उपभोक्ताओं से ११ रुपए प्रति एक हजार लीटर से ही बिल वसूल कर रही है। वर्तमान में आईपीएच से मिल रहे पानी की एवज में नगर परिषद को २० लाख रुपए प्रति माह बिल आ रहा है। ऐसे में नगर परिषद पर हर महीने ५ से ६ लाख की देनदारियां बढ़ रही है।



:80 फीसदी हुए मीटर खराब

> नए मीटर लगाने में आया था एक हजार खर्च