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डाउनलोड करेंनालागढ़. बद्दी ईएसआईसी कार्यालय में एक मां ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए व एक पत्नि ने पति की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी किडनी देने के लिए तैयार हो गई। ईएसआईसी के तहत पंजीकृत भूपेंद्र कुमार बलौदी जो भट्टी गांव, जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तरांचल के रहने वाले हैं। वह एसए इंटरप्राइजेज बद्दी में पिछले काफी समय से नौकरी कर रहे हैं जिनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी है। दूसरे मामले में सुशील कुमार जो कि कालाअंब में विमल इंडस्ट्रीज में काम कर रहे हैं व ईएसआई के सदस्य हैं व गांव जंगला भुड जिला सिरमौर के रहने वोले हैं, की भी दोनों किडनियां खराब हो चुकी है।
पहले कर दिया था इनकार
भूपेंद्र अपनी पत्नी के साथ व सुशील अपनी मां के साथ ईएसआईसी कार्यालय बद्दी पहुंचे व जनसंपर्क अधिकारी देवव्रत यादव से मिले। उन्होंने उनको कहा कि अगर आप चारों के टिशू एक दूसरे से मैच नहीं कर रहे हैं तो इसका क्रॉस इग्जामिन करवा लो। जब भूपिंद्र के टिशू सूशील की मां से मैच किए गए तो वो मिल गए वहीं जब सुशील के टिशु भूपेंद्र की पत्नी सुधा से मिलाए गए तो वो भी मैच कर गए। अब दोनों की किडनियां ट्रांसफर होने का रास्ता भी साफ हो गया।
भुपेंद्र की पत्नी सुधा बलौदी ने अपने पति की जान बचाने के लिए उसे अपनी एक किड्नी देने व सुशील की मां सोमा देवी जो कि 62 वर्ष की हैं उन्होंने अपने बेटे क ी जान बचाने के लिए अपनी किड्नी देने की प्रार्थना डॉक्टरों से की, लेकिन दोनों के ही टिशू मैच न होने के कारण डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया।
महिलाओं को किया सम्मानित
ईएसआई कार्यालय में जब वीरवार को यह चारों लोग खुशी-खुशी पहुंचे व क्षेत्रीय निदेशक बीएस नेगी व जनसंपर्क अधिकारी देवव्रत यादव ने उनकी हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया में दूसरे को जिंदगी देना सर्वोपरि है। उन्होंने उनको सम्मानित भी किया।
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