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दो आईएएस सहित एचपीसीए मुखिया के खिलाफ चालान पेश करने की तैयारी

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - शिमला
हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ((एचपीसीए)) को एसोसिएशन से कंपनी में बदलने के मामले की विजिलेंस जांच पूरी हो गई है। अगस्त 2013 में धर्मशाला थाने के तहत दर्ज किए गए इस केस में अब स्टेट विजिलेंस की एसआईटी चालान पेश करने की तैयारी कर रही है। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार एसोसिएशन को बिना अनुमति चुपचाप ही कंपनी में बदलने और फिर यह बात छिपाकर जमीन लीज पर लेने संबंधी जो गड़बड़ी पाई जा रही है, उसके आधार पर एसोसिएशन अध्यक्ष समेत दो आईएएस अधिकारी निशाने पर हैं। आईएएस अधिकारी जमीन को कमर्शियल यूज के लिए देने संबंधी मामले में फंसे हैं। इनके अलावा एचपीसीए के दूसरे पदाधिकारियों को भी उनकी भूमिका के अनुसार आरोपी बनाया जा
सकता है।
फिलहाल फाइनल रिपोर्ट में इनके नाम शामिल करने हैं या नहीं और किसे आरोपी बनाया जा सकता है, इसका खुलासा अभी विजिलेंस नहीं कर रही है। मगर दावा किया जा रहा है कि जांच के दौरान जो रिकॉर्ड और साक्ष्य मिले हैं उससे यह केस काफी मजबूत लग रहा है। अगले कुछ दिन में विजिलेंस इसका चालान पेश कर देगी। केस की जांच डीआईजी एपी सिंह की अगुवाई वाली एसआईटी कर रही है। डीआईजी के अनुसार जांच पूरी हो गई है, जल्द चालान पेश किया जाएगा।




कारण 2

कारण 1

विजिलेंस के अनुसार एचपीसीए कंपनी में तो तब्दील हो गई, लेकिन इसकी सूचना रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी को समय पर नहीं दी गई। 2012 में एसोसिएशन ने रेजोल्यूशन पास कर इसे कंपनी एक्ट सेक्शन 25 के तहत पंजीकृत किया गया। आरोप है कि एचपीसीए ने खुद को कंपनी में तब्दील करने की बात सरकार से छिपाई और लैंड लीज के लिए अप्लाई कर दिया। बाद में सरकार की ओर से खिलाडिय़ों के रेजीडेंशियल के लिए लीज पर जमीन दे दी। जिसे बाद में होटल पवेलियन में तबदील किया गया। यदि सरकार को कंपनी बनने की जानकारी होती तो जमीन लीज पर न मिलती।

एचपीसीए को पहले हिमालय प्लेयर क्रिकेट एसोसिएशन के नाम से वर्ष 2005 में कानपुर में पंजीकृत किया गया था, लेकिन दो महीने बाद ही इसका नाम बदलकर हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन कर दिया गया। 2009 में इसे कानपुर से शिफ्ट कर चंडीगढ़ किया गया। यहां के रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटी ऑफिस में एड्रेस चेंज के लिए अप्लाई किया गया और इसमें अपना पता एचपीसीए धर्मशाला स्टेडियम का दिया गया। आरोप है कि यह सारी प्रक्रिया चुपचाप की गई। इस बारे में सरकार को शिकायत भी मिली थी।



जांच में सामने आ रही ये दो गड़बडिय़ां

एचपीसीए को एसोसिएशन से कंपनी में बदलने के मामले की विजिलेंस जांच पूरी

एचपीसीए के दूसरे पदाधिकारियों को बनाया जा सकता है आरोपी