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170 करोड़़ से सुधरेगी शहर में सीवरेज व्यवस्था
भास्कर न्यूज - शिमला
शहर के विभिन्न हिस्सों को सीवरेज सुविधा से जोडऩे के लिए नगर निगम प्रशासन 170 करोड रुपए की डीपीआर तैयार की है। सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए तैयार इस डीपीआर के तहत उन क्षेत्रों को वरियता के आधार पर सीवरेज सुविधा से जोड़ा जाएगा। जिन क्षेत्रों में अभी तक सीवरेज लाइन नहीं बिछाई गई है। इससे पहले 2010 में भी इस प्रोजेक्ट लिए दो चरणों के तहत 146 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की गई थी। लेकिन इस पर सरकार और निगम प्रशासन की आपसी सहमति न बन पाने की वजह से यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया था। इसके बाद पिछले वर्ष 31 जुलाई 2013 को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर तैयार करने का जिम्मा आईपी एच और निगम प्रशासन को सौंपा गया और इसे ईपीसी मोड पर चलाने के लिए कहा गया। आइपी एच विभाग की ओर से तैयार की गई इस डीपीआर को बुधवार को सदन के सामने रखा गया, जिसमें सभी पार्षदों ने अपनी सहमति देते हुए पास कर दिया है। अब निगम प्रशासन इस डीपीआर को शहरी विकास विभाग के निदेशक के पास अप्रूवल के लिए भेजेंगे।
2009 से लटका था प्रोजेक्ट
जेएनएनयूआरएम की ओर से शहर की सीवरेज व्यवस्था को सुधारने के लिए 2009 में प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। इसके लिए निगम प्रशासन ने 2010 में दो चरणों में 146 करड़ रुपए की डीपीआर तैयार की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप ((पीपीपी)) मोड में चलाने के लिए निगम प्रशासन को कहा था, लेकिन निगम प्रशासन पीपीपी मोड पर चलाने के लिए राजी नहीं हुआ और इसे इंजीनियरिंग प्रिक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन ((ईपीसी)) पर चलाने के लिए अड़ा रहा। तीन सालों प्रोजेक्ट के लटके रहने के बाद 31 जुलाई 2013 को कैबिनेट की बैठक में इस प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से डीपीआर तैयार करने का जिम्मा आईपीएच और नगर निगम को दिया गया। साथ में कैबिनेट ने इसे आईपीएच और निगम प्रशासन को ईपीसी मोड पर चलाने के लिए अपनी सहमति जताई थी।
यह होगा फायदा
इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के लेफ्ट आउट एरिया में सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी जहां अभी तक सीवरेज लाइन नहीं है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में बिछी हुई सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है, उन्हें भी बदल कर नई सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी। शहर के लगभग 14 हजार भवन अभी तक सीवरेज सुविधा से नहीं जुडे हैं। इन लोगों को सीवरेज लाइन न होने की वजह से सेफ्टी टैंक बनाने पड़ते हैं, जो बरसात के समय में भर जाते हैं और इनसे बीमारियों के बढऩे का भी खतरा बना रहता है। इन सेफ्टी टैंक को बनवाने के लिए लोगों को पचास हजार से एक लाख तक का खर्चा आता है। लेकिन सीवरेज सुविधा मिलने से लोगों क ा यह खर्चा बच जाएगा। लोगों को सीवरेज लाइन के बिछ जाने से सेफ्टी टैंक बनाने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।
न्यू मर्ज एरिया सहित 14 हजार भवनों को नहीं है सीवरेज की सुविधा
प्रस्ताव तैयार