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स्टेयरिंग पर नहीं, किलोमीटर पर गिनी जाती है ड्यूटीएचआरटीसी कर्मचारियों का कहना ऑफिस कार्यालय की तरह ड्यूटी टाइम हो तय
भास्कर न्यूज - शिमला
हिमाचल पथ परिवहन निगम में कर्मचारियों के लिए ड्यूटी आवर के लिए नियम अलग है। इस कारण चालक परिचालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अभी सिर्फ सीट पर बैठकर चालक परिचालक की ड्यूटी आवर को नहीं गिना जाता है, इसको किलोमीटर के हिसाब से देखा जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि जब वह बस में स्टेयरिंग पर बैठते है तो वह उनकी ड्यूटी में शामिल नहीं है, जबकि यह देखा जाता है कि बस ने कितना किलोमीटर तय किया है। इसके अनुसार ही चालक परिचालक के ड्यूटी आवर गिने जाते हैं। इस कारण बेशक कर्मचारी दिन भर ड्यूटी पर हो, लेकिन उनके वह आवर नहीं गिने जाते है। हिमाचल पथ परिवहन निगम कर्मचारी समन्वय समिति के पूर्व प्रवक्ता खेमेंद्र गुप्ता का कहना है कि परिवहन निगम प्रबंधन को ड्यूटी आवर में बदलाव करना चाहिए। कई बार जब लांग रूट पर चालक परिचालक जाते है, तो वह दूसरे दिन ही वहां से वापस लौट आते है। ऐसे में व 24 घंटे ड्यूटी पर होते है। जब वह बस की सीट पर होते है तो इसका मतलब वह ड्यूटी पर है। बस कितनी चलती है, यह रूट पर निर्भर करता है। कर्मचारियों का कहना है कि चालक परिचालक के लिए भी कार्यालय टाइम निर्धारित करना चाहिए। जो कर्मचारी ऑफिस में बैठते है, वह सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ड्यूटी करते है। जबकि चालक परिचालक 15 से 20 घंटे ड्यूटी पर रहते है। ऐसे में उनके लिए कोई नियम होने चाहिए। जब कर्मचारी घर से ड्यूटी पर निकलता है, वह तब से ही काम पर होता है। उनका कहना है कि प्रबंधन ड्यूटी ऑवर तय करें। एमडी डॉ. आरएन बत्ता का कहना है कि ड्यूटी ऑवर को लेकर चर्चा चली हुई है। सरकार ही अंतिम निर्णय लेगी।
बीओडी में रखा है मामला
बीओडी की बैठक में कर्मचारियों की 48 घंटे रोस्टर प्रणाली को पहले ही रखा गया है, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। एचआरटीसी कर्मचारी समन्वय समिति ने इस मामले को लेकर फिर से प्रबंधन को चेताने की तैयारी की है। अध्यक्ष रोशन चौहान का कहना है कर्मचारियों के ड्यूटी ऑवर निर्धारित हो, ताकि उन्हें आराम भी मिल सके।