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आग की लपटों से नहीं बच पाया हेरिटेज गॉर्टन कैसल

7 वर्ष पहले
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अशोक चौहान - शिमला
ऐतिहासिक धरोहरों में से एक गॉर्टन कैसल बिल्डिंग ((एजी ऑफिस)) के टॉप के दो फ्लोर देखते ही देखते खाक हो गए। ब्रिटिश शासनकाल में जिस बिल्डिंग में कभी रात भर कोयले जलाकर सेंट्रल हीटिंग सिस्टम चलता था, वही शार्ट सर्किट की एक छोटी सी चिंगारी से दहक उठे। कुल 266 कमरों वाली इस बिल्डिंग के 60 से ज्यादा कमरे आग की चपेट में आ गए। दशकों से सैलानियों को अपनी सुंदरता और ऐतिहासिकता से लुभाने वाली यह बिल्डिंग चंद घंटों में ही खंडहर सी दिखने लगी। आग ने न सिर्फ ऐतिहासिक धरोहर को खाक कर दिया बल्कि इसमें रखा लाखों लोगों का जीपीएफ, पैंशन के रिकॉर्ड समेत सरकारी विभागों का ऑडिट रिकॉर्ड भी
खराब कर दिया। वर्ष 1840 में आईसीएस गार्टन की बनाई यह बिल्डिंग बाद में जेम्स वॉल्कर ने खरीदी थी। वर्ष 1900 में केंद्र सरकार ने एक लाख 20 हजार रुपए में इसे खरीद लिया। बिल्डिंग को न्यू लुक देने का काम शुरू हुआ वर्ष 1901 में। करीब पांच साल बाद रेजीडेंट इंजीनियर एचएफ चैसनी ने इसका काम पूरा करवाया। इस पर करीब 11 लाख का खर्चा आया था। यूएस क्लब, जीपीओ, गेयटी के बाद यह बिल्डिंग भी उस फेहरिस्त में शामिल हो गई, जिन्हें आग से नहीं बचाया जा सका।