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जर्मन नर्सरी तकनीक से तैयार होंगे अच्छे पौधे

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - शिमला
जर्मन सरकार और जर्मन विकास बैंक के सहयोग से प्रदेश में चलाई जा रही फॉरेस्ट इको सिस्टम क्लाइमेंट प्रूफिंग परियोजना की व्यवहारिता को लेकर जर्मन का दल शिमला आया है। जिला चंबा और कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करने के बाद दल ने शिमला में पारिस्थितिकीय समस्याओं का मूल्यांकन किया। इस दौरान दल ने स्थानीय समुदायों व वन विकास समितियों से विस्तृत चर्चा की।
प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता ने कहा कि मौसम बदलाव की स्थिति से निपटने की दिशा में किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में प्रदेश अहम भूमिका निभा रहा है। मौसम बदलने से वनस्पति के परंपरागत आचरण में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जिसका प्रत्यक्ष परिणाम लेंटाना जैसी हानिकारक प्रजातियां उत्पन्न हो रही हैं। इसका ज्यादा असर चंबा और कांगड़ा जिले में है।
इससे पूर्व इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू के वैज्ञानिक प्रोफेसर एनएच रविंद्रनाथ ने विश्वस्तरीय मानकों पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की। जर्मन दल के डॉ. जोखिम और डॉ. डाइटर मिल्लर ने चंबा और कांगड़ा के अपने दौरे की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और सुझाव दिया कि जर्मन में अपनाई जा रही नर्सरी तकनीकों की यदि हिमाचल में अपनाया जाए तो कम समय में अच्छे पौधे तैयार किया जा सकते हैं। स्टेट कौंसिल फार साइंस, टैक्नोलॉजी एंड एनवायर्मेंट विभाग के निदेशक डॉ. एसएस नेगी ने कहा कि मौसम बदलाव विषय को लेकर विभाग को विशेष सैल स्थापित किया जाना चाहिए। इससे प्रभावी रुप से निपटने में सहायता मिल सकती है।
इस अवसर पर एससी श्रीवास्तव प्रधान मुख्य अरण्यपाल ((पीएडंडी)), केएफड्ब्ल्यू के प्रोजेक्ट मेनेजर मौरिता राईन, आईआईएफएम मधु वर्मा और एनएस राठौर, अतिरिक्त प्रधान सचिव मुख्य अरण्यपाल ((कैट प्लान)) एसएस नेगी मौजूद थे।