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परिवहन निगम ठेके पर देगा बसें, कर्मचारी संघ विरोध में

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - शिमला
प्रदेश में जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्युअल मिशन के तहत आने वाली 800 बसों में चालक और परिचालकों को ठेके पर रखने का प्रपोजल है। निगम ने चालकों और परिचालकों के लिए 6000 और 4000 रुपए मासिक वेतन देना फिक्स किया है। एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी संगठन और एचआरटीसी प्रदेश समन्वय समिति ने ने एचआरटीसी एमडी के समक्ष विरोध दर्ज किया है। तकनीकी कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि चालक और परिचालकों को ठेके पर रखना गलत है। फैसले नहीं बदला तो आंदोलन होगा।



सोमवार शाम को एचआरटीसी एसोसिएशन की एडमिन डीएम एपी नड्डा के साथ बैठक हुई। इसमें एचआरटीसी कर्मचारियों के आरएंडपी रूल में संशोधन करने के बारे में चर्चा हुई। बैठक के बाद सरकार को रूल संशोधन करने के बारे में प्रस्ताव तैयार किया गया।

तकनीकी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि ठेकेदारी प्रथा लागू किए जाने से एचआरटीसी और घाटे में जाएगी। निगम पहले ही 700 करोड़ रुपए के घाटे में चल रही है। निजी हाथों में जाने से कर्मचारियों को तनख्वाह की लाले भी पड़ सकते हैं।

सरकार ने बसों को प्रदेश के 56 शहरों में चलाने का फैसला लिया है। पहले भी केंद्र सरकार ने जेएनएनयूआरएम के तहत प्रदेश को 75 बसें दी हैं। इसके लिए निगम ने सोसाइटी तैयार कर केंद्र को आरएफटी दी थी। ये बसें एचआरटीसी ने चलाई। ड्राइवर-कंडक्टर निगम के ही रखे गए।

आरएंडपी रूल में संशोधन पर चर्चा

घाटे में जाएगा निगम

५६ शहरों में चलेंगी बसें

प्रदेश सरकार ने फरवरी में 800 नई बसें आने की बात कही है। जब तक प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को आरएफटी ((रिक्वेस्ट प्रपोजल)) नहीं दे देती तब तक बसें नहीं आएगी। केंद्र सरकार बसें देने से पहले इन्हें चलाने के लिए स्टाफ, मॉनिटरिंग, बस अड्डे, रजिस्टर्ड सोसाइटी, चालक और परिचालकों की तनख्वाह और किन-किन रूटों पर बसें चलाई जानी है इसका पूरा ब्योरा केंद्र सरकार को देना पड़ेगा। अभी तक सरकार ने आरएफटी केंद्र को नहीं दी है।

बिना आरएफटी से नहीं आएगी बसें

फैसला न बदला तो आंदोलन