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ऐतिहासिक भवनों में नहीं हैं फायर फाइटिंग सिस्टम
भास्कर न्यूज - शिमला
शहर में ऐतिहासिक भवनों, स्कूलों और अस्पतालों की सुरक्षा रामभरोसे चल रही है। हर साल फायर ब्रिगेड विभिन्न विभागों में जाकर मॉकड्रिल करती है, अभियान चलाती है, आग से निपटने के इंतजाम करने को भी कहती है। मगर इन सबके बावजूद कोई सबक नहीं लेता। एजी ऑफिस बिल्डिंग में लगी आग शहर में ऐसी पहली घटना नहीं है जिससे कोई सबक लिया जा सके। इससे पहले भी यूएस क्लब, जीपीओ और गेयटी में आग की कई घटनाएं हो चुकी है जिसके बावजूद इन भवनों को आग से बचाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। यहां तक की इन भवनों में लगे फायर उपकरण भी एक्सपायर होने के बाद बदले नहीं जा रहे।
अस्पतालों में भी हालत खराब
शहर के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी के पुराने भवन में एक साल पुराने सिलेंडर लटके हैं। इसी तरह केएनएच में भी एक्सपायरी सिलेंडर लगे हैं। वहीं, लक्कड़ बाजार गल्र्स स्कूल, एसडी स्कूलों में भी आग से बचने के फिलहाल कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
फायर ब्रिगेड के अधिकारी, कर्मचारी विभागों में जाकर जागरुक करते हैं पर कोई गंभीर नहीं
॥फायर ब्रिगेड के पास आग बुझाने के आधुनिक उपकरण हैं। हर साल विभागों को डेमोस्ट्रेशन के जरिए जागरूक भी करते हैं। अब यह विभागों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने यहां फायर फाइटिंग सिस्टम मजबूत करे।
आईडी भंडारी, निदेशक अग्निशमन सेवाएं, डीजी होमगार्ड
जीपीओ और रिपन अस्पताल में फायर एस्टियूंगिशर २०१३ से एकस्पायरी ही लटक रहे हैं
इनमें सबसे पहले नाम आता है मालरोड स्थित मुख्य डाकघर का। इसमें लगे आग बुझाने वाले फायर एस्टियूंगिशर सिलेंडर दिसंबर 2013 में ही एक्सपायरी हो चुके हैं। लेकिन इन्हें दो महीने बाद भी नहीं बदला गया है। इसी तरह रिपन अस्पताल के कई वार्डों में भी महीनों पहले के एक्सपायरी सिलेंडर लटके हैं। ये दोनों हेरिटेज भवन हैं और ज्यादातर लकड़ी के ही बने हैं। आए दिन हजारों लोगों की यहां आवाजाही भी होती है लेकिन इन इंतजामों से आगजनी पर कैसे काबू पाया जाएगा, ये सवाल उठ रहे हैं।
नहीं सीखते सबक