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खामियां ठीक करते तो सुरक्षित होता ‘गॉर्टन कैसल’

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - शिमला
यदि एजी प्रशासन समय रहते सुरक्षा के इंतजामों को दुरुस्त कर लेता तो 110 साल से दुर्लभ राजस्थानी कारीगरी को संजोए रखने वाली ऐतिहासिक गॉर्टन कैसल बिल्डिंग की पहचान बरकरार रह जाती। दरअसल इस बिल्डिंग में कुछेक ऐसी खामियां थी जिससे नुकसान इतना ज्यादा हो गया। ये खामियां निकाली थी एनडीआरएफ और दमकल की टीम ने। पिछले साल नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट रिस्पॉन्स फोर्स और दमकल ने यहां डेमोस्ट्रेशन किया था। इस दौरान इन खामियों को दूर करने के लिए हाईड्रेंट ओपन रखने, पार्किंग सही करने, इंटरनल सिस्टम मजबूत करने और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने जैसे कुछेक सुझाव प्रशासन को दिए गए। लेकिन प्रबंधन इन सब पर काम करना भूल गया। बाद में फायर ब्रिगेड की मदद से कर्मचारियों को तो ट्रेनिंग दी गई, लेकिन बाकी सुझावों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया। अब दमकल और पुलिस की जांच में भी कई खामियां सामने आ रही हैं।
ये निकल रही खामियां
हाईड्रेंट की नहीं थी जानकारी
एजी ऑफिस में दमकल के दो हाईड्रेंट लगे हैं। मगर दफ्तर के पिछली तरफ जो हाईड्रेंट था उसकी किसी को जानकारी ही नहीं थी। यह एक कोने पर जमीन से काफी नीचे दबा हुआ था। यही कारण था कि पिछली तरफ से आग बेकाबू हो गई। अग्निकांड के समय यदि तुरंत इसकी जानकारी दी जाती तो इससे पानी लेकर टॉप फ्लोर में लगी आग पर काबू किया जा सकता था।
बेतरतीब पार्किंग
दफ्तर परिसर के चारों ओर दमकल की गाड़ी घूम सकती है, लेकिन यह तभी संभव है जब यहां गाडिय़ां पार्क न हों। मंगलवार तड़के सुबह जब यह हादसा हुआ तब भी यहां दर्जनों गाडिय़ां खड़ी थी जिससे दमकल की गाड़ी को घंटों तक गेट पर ही खड़ा करना पड़ा।
इंटरनल सिस्टम कमजोर
बिल्डिंग के अंदर फायर फाइटिंग से निपटने का सिस्टम काफी कमजोर साबित हुआ। अंदर फायर हाईड्रेंट के पाइप तो लगे थे लेकिन इनमें पानी नहीं था। अंदर सिर्फ सिलेंडर थे जो नाकाफी थे। फायर सेंसर ने भी अलॉर्म नहीं दिया।