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जिस जगह निर्माण हो चुके हैं, उसे ग्रीन बेल्ट से हटाओ

7 वर्ष पहले
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शिमला। शहर में ग्रीन बेल्ट के विवाद को निपटाने के लिए बनाई उच्च स्तरीय कमेटी के पास काफी संख्या में लोग सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। भराड़ी के पूर्व पार्षद जितेंद्र चौधरी ने बुधवार को कमेटी क कई सुझाव दिए। कमेटी को उन्होंने बताया कि वर्ष २००० में बिना फिजिकल सर्वे के ग्रीन बेल्ट घोषित कर दिए गए। शहर के कई ऐसे पॉकेट ग्रीन बेल्ट में शामिल हो गए जहां पहले से काफी निर्माण हो चुका है। टीसीपी की उस वक्त ग्रीन बेल्ट घोषित करने की नोटिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि शांकली, लौंगवुड के कई ऐसे क्षेत्रों को ग्रीन बेल्ट में रख दिया गया। जहां पर पेड़ थे ही नहीं। जिन क्षेत्रों में पेड़ नहीं हैं और उन्हें ग्रीन बेल्ट में रखा गया है तो ऐसे क्षेत्रों को इससे तत्काल बाहर किया जाना चाहिए।
पूर्व पार्षद जितेंद्र चौधरी ने कमेटी को बताया कि शहर के ६० फीसदी क्षेत्र में वन हैं। इसके लिए वन विभाग पहले ही डिर्मोक्टेड फॉरेस्ट और रिस्ट्रिक्टेड फॉरेस्ट एरिया घोषित कर रखे हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण पूरी तरह से बैन है।
कमेटी को उन्होंने यह भी बताया कि २००० से पूर्व दर्जनों लोगों ने शहर में प्लॉट खरीदे। २००० से पहले जिन्होंने मकान बना दिए। उन्हें तो कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन २००० के बाद कुछ एरिया ग्रीन बेल्ट घोषित होने के बाद ये पिछले १४ सालों से अपने प्लॉटों पर भवन निर्माण नहीं करवा पा रहे हैं। ये निगम को बराबर टैक्स भी दे रहे हैं।