- Hindi News
- डीपीआर तैयार, टेंडर किए फिर भी नहीं बना चाटी पुल
डीपीआर तैयार, टेंडर किए फिर भी नहीं बना चाटी पुल
शिव डबरैही.रामपुर बुशहर
करीब आठ वर्षों से लंबित सतलुज नदी पर प्रस्तावित चाटी पुल निर्माण में हो रही देरी को लेकर विकास संघर्ष समिति ने जंग का ऐलान कर दिया है। पीडब्यूडी महकमे द्वारा चाटी पुल निर्माण के लिए लोकेशन बदलने एवं निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर करीब आधा दर्जन पंचायतों के लोगों ने आरटीआई के तहत तमाम तकनीकी सूचनाएं मांगी है। इस संबंध में बुधवार सांयकाल निरमंड पंचायत की तुनन, सरपारा, खरगा, सरघा, कुशवा व चाटी का एक प्रतिनिधिमंडल एसई कार्यालय पहुंचा। सरपारा पंचायत पूर्व प्रधान मोहन कपाटिया की अध्यक्षता में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने आरटीई में पूछे सवाल में कहा कि चाटी पुल निर्माण के लिए कई वर्षों पहले जमीन अधिग्रहण की गई थी और इसकी एवज में आरएचईपी ने जमीन अधिग्रहण की एवज में लोगों को करीब 64 लाख रुपये भी मुआवजे के तौर पर अदा किया गया है। पुल निर्माण का डिजाइन एवं डीपीआर भी तैयार की गई और टेंडर तक लगा दिए गए। उन्होंने कहा कि इन तमाम प्रक्रियाओं एवं भूमि अधिग्रहण के बावजूद आखिर पुल के लोकेशन बदलने की वजह क्या रही। उन्होंने इसके तकनीकी विषयों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पंचायतवासियों का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी ने पुल की जो नई लोकेशन खोजी है वह जगह पहले ही सिंकिंग जोन की जद में है। इस जगह पर पहले 60 लाख रुपये की लागत से डीएवी ने अपना कंपलेक्स तैयार किया था जो भूस्खलन से खंडहर बन चुका है। जियोलॉजिस्ट द्वारा पहले ही इस जगह को अनसेफ घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि विभाग ने पुल की जो नई लोकेशन खोजी है उसमें न तो मुख्य बस स्टेंड को जोडऩे का प्रावधान है और न ही पांच पंचायत के केन्द्र बिंदु चाटी को इस मार्ग से जोडऩे का प्रावधान है।
गुमराह कर रहे हैं कुछ नेता
रामपुर परियोजना प्रभावित पांच पचायतों के लोगों का कहना है कि क्षेत्र के कुछ नेता व्यक्तिगत फायदे के लिए पुल की लोकेशन बदलने के सरकार को गुमराह कर रहे हैं। पंचायत क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रामपुर परियोजना से प्रभावित इन पंचायतों के लिए एरिया डवेलपमेंट के तहत पुल निर्माण के लिए वर्ष 2006 के 3 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की और इसे एसजेवीएन के माध्यम से ही बनाया जाना प्रस्तावित था। स्थानीय नेताओं की वजह से जहां पुल निर्माण में देरी हुई वहीं अब पुल की निर्माण लागत भी 8 करोड़ तक पहुंच गई है। अब जब भूिम अधिग्रहण से लेकर पुल निर्माण के लिए टेंडर भी लगा दिए तो इन नेताओं ने व्यक्तिगत फायदे के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष झूठे साक्ष्य प्रस्तुत किए। आरटीआई के तहत मांगी सूचना के बाद समस्त पंचायत के लोग मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास अपना पक्ष रखेंगे। समिति पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पुल की पुरानी लोकेशन को यथावथ नहीं रखा तो वे आगामी लोकसभा चुनाव में राइट टू रिजेक्ट पर विचार करेंगे।
बॉक्स न्यूज
प्रभावित लोगों ने बनाई विकास संघर्ष समिति
चाटी पुल निर्माण में लाकेशन बदलने एवं निर्माण कार्य में हो रही देरी के लिए सरपारा, तुनन, कुशवा, खरगा व सरघा पंचायत के लोगों ने संयुक्त विकास संघर्ष समिति का गठन किया गया है। सरपारा पंचायत के पूर्व प्रधान मोहन कपाटिया समिति के अध्यक्ष चुने गए जबकि खरगा पंचायत के पूर्व प्रधान मोतीराम कश्यप समिति के महासचिव बनाए गए हैं। सोमवार को समिति के गठन में करीब 80 लोगों ने हिस्सा लिया। समिति में बुद्धिसिंह ठाकुर को उप प्रधान, संजीव ठाकुर को कोषाध्यक्ष, बीआर मेहता व श्याम कैदारटा को लेखाकार, राजेश नेगी को कार्यालय सचिव, धर्मेन्द्र बोज्ञाटो को प्रैस सचिव तथा दर्शन दुबे को मुख्य सलाहकार चुना गया। इसके अलावा दीपेश, महेन्द्र ठाकुर, देवराज, सुरजीत, रोशन लाल, कृष्ण भगत, लाल ठाकुर, बिरमा, कांतादेवी, कमादेवी, शांतादेवी, पम्मी ठाकुर को सदस्य चुना गया। विशेष आमंत्रित सदस्यों में सरपारा, कुशवा, खरघा, तुनन व सरघा पंचायत के पंचायत प्रधान को शामिल किया गया।