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कैथू में काटे बान के तीन पेड़ तिरपाल के नीचे छुपा दिए ठूंठ

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - शिमला
ताराहॉल स्कूल के पास एक प्रभावशाली व्यक्ति ने बान के तीन पेड़ काट डाले। पेड़ों की ठूंठ को तिरपाल के नीचे छिपाया गया है। ये पेड़ तीन दिन पहले काटे गए हैं। इसके अलावा बान के एक पेड़ की जड़ों को काट दिया गया है। डीएफओ अनीश शर्मा ने बताया कि उनके पास अभी तक पेड़ काटने की सूचना नहीं है। वह डिप्टी रेंजर ज्ञानचंद के साथ वन कर्मियों को मौके पर भेज रहे हैं। पेड़ काटने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकतर मामलों में पेड़ वन विभाग से मिलीभगत के कारण काटे जा रहे हैं। वन कर्मी उसके बाद पेड़ों की ग्रेडिंग भी कम आंकते हैं। जिससे पेड़ काटने वाले पर जुर्माना भी कम लगता है।
पेड़ की ठूंठ पर किसी की नजर न पड़े। इसके लिए ठूंठ को पीले तिरपाल से ढक दिया गया ताकि यह लगे कि वहां निर्माण कार्य चल रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक प्रभावशाली व्यक्ति यहां पर भवन निर्माण करवा रहा है। भवन के रास्ते को सीधे कनेक्टिविटी करने के लिए इन पेड़ों को ठिकाने लगाया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक चार दिन पहले इन पेड़ों को काटा गया है। पेड़ काटने के लिए फॉरेस्ट गार्ड की छुट्टी वाला दिन चुना गया। इस एरिया का फॉरेस्ट गार्ड २३ जनवरी से छुट्टी पर था। इसी को देखते हुए फिंगास्क इस्टेट में भी देवदार का एक पेड़ काटा गया था। पेड़ काटने के बाद इसकी लकड़ी को रातोंरात ठिकाने भी लगा दिया गया।
निगम से जंगल लेते ही पेड़ों का कटान शुरू
सरकार ने जब से नगर निगम से जंगल वापस लिए हैं। शहर में डेढ़ दर्जन से अधिक हरे पेड़ों को काटा जा चुका है। पार्षदों की शिकायत के बावजूद वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं। एक माह पूर्व मेयर संजय चौहान की शिकायत के बावजूद अनाडेल में काटे गए पेड़ों का मुआयना करने वन कर्मी नहीं पहुंचे। फिंगास्क इस्टेट में देवदार के पेड़ की जड़ें पिछले तीन माह से खोदी जा रही थी। स्थानीय लोगों ने फॉरेस्ट गार्ड से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। २५ जनवरी को सुबह पेड़ को गिरा दिया गया।



बचे हुए पेड़ का ठूंठ ((गोले में))।

बान के पेड़ों को काटकर तिरपाल के नीचे छिपा दिया गया है।

करीब चार दिन पहले काटे गए हैं यह पेड़, डीएफओ ने कहा सूचना नहीं