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टिकट के लिए दिल्ली में दिग्गजों की लॉबिंग
भास्कर न्यूज - शिमला
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा के साथ प्रदेश के तीन कांग्रेस नेताओं ने हाईकमान में पैठ स्थापित बना ली है। परिणामस्वरूप सत्तारूढ़ प्रदेश कांग्रेस को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। सरकार और संगठन अलग-अलग दिशाओं में चल रहे हैं। सरकार में बैठा गुट इसे राजनीतिक नुकसान के तौर पर देख रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए टिकट आबंटन भी एक तरफा नहीं होगा। हाईकमान में प्रभावशाली हो चुके गुट की राय प्रत्याशियों के चयन में अहम भूमिका अदा करेगी। फिलहाल लोकसभा चुनाव के लिए टिकटों का आबंटन सेंट्रल इलेक्शन कमेटी करेगी।
राहुल का फॉर्मूला नहीं समझ रहे नेता
प्रदेश कांग्रेस के नेता राहुल गांधी का फार्मूला नहीं समझ रहे हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि संगठन अपने स्तर पर गतिविधियां चलाए। जिसमें सरकार का दखल न हो। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू शुक्रवार को लौट रहे हैं। उनका कहना है कि स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक के बाद टिकट फाइनल करने का पूरा मामला सेंट्रल इलेक्शन कमेटी देखेगी। ऐसे में संगठन का कोई रोल नहीं रह गया है। इसलिए मैं वापस लौट रहा हूं।
लोकसभा चुनाव: अपने गुट के लिए टिकट की दौड़
लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत टिकट आबंटन पार्टी की गुटबाजी के कारण अहम हो गया है। शिमला व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के दोनों गुट अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस का गुट विधायक मोहन लाल ब्रागटा को टिकट देने का पक्षधर है तो दूसरा गुट विनोद सुल्तानपुरी के पक्ष में खड़ा है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में निर्दलीय विधायक राजेंद्र राणा को कांग्रेस दमदार प्रत्याशी मान रही है। दूसरा गुट पार्टी कार्यकर्ता को टिकट देने का पक्षधर है।
यहां पर दिखा प्रभाव
दस जनपथ तक मजबूत पकड़ बना चुकी चौकड़ी ने पहला झटका विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में दिया था। कुलदीप कुमार अध्यक्ष बनने की तैयारी कर चुके थे, एैन मौके पर बृज बिहारी लाल बुटेल कुर्सी पर बैठ गए। इसके बाद चुनाव हारे हुए नेताओं को अहम ओहदेदारी का मामला आलाकमान के कानों में पहुंचा। अब राज्यसभा के टिकट में सत्ताधारी गुट की ओर से आगे किए गए गंगूराम मुसाफिर की जगह विप्लव ठाकुर बाजी मार गई।
मौका मिलते ही दिल्ली का रुख
सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार में आशा कुमारी व राकेश कालिया मंत्री नहीं बन पाए। लगातार तीन चुनाव जीतने वाले कालिया ने अनमने तौर पर सीपीएस का पद लिया था मगर कुछ दिनों बाद ही छोड़ दिया। राहुल गांधी की टीम में काम करने का मौका मिलते ही दिल्ली का रुख किया। आशा कुमारी के साथ टकराव चला आ रहा है।
ये हैं चार प्रभावशाली नेता
आशा कुमारी के अलावा राकेश कालिया कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। विप्लव ठाकुर ने राज्यसभा का टिकट लेकर अपना प्रभाव साबित कर दिया है। आनंद शर्मा पहले से दिल्ली की सियासत में सक्रिय हैं। विप्लव को राज्यसभा का टिकट मिलने से पहले तिकड़ी ने प्रदेश की राजनीति को एक नई दिशा की ओर बढ़ाया है।
कांग्रेस में गुटबाजी
आनंद, आशा, विप्लव और कालिया ने आलाकमान में बनाई पैठ, सेंट्रल इलेक्शन कमेटी ही करेगी तय