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पॉल्यूशन डिटेक्शन मशीन 8 माह से डिब्बे में बंदनहीं हो रहे ऑन दी स्पॉट चालान, आधुनिकीकरण स्कीम में मिली थी दो मशीनें, डैमो देने नहीं आया कंपनी का इंजीनियर, फोटो समाचारलखनपाल बोले, गांधी ने...

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज हमीरपुर

जिला पुलिस को आधुनिकीकरण स्कीम के तहत मिली पॉल्यूशन डिटेक्शन मशीन सात माह से डिब्बे में बंद है। ऑन दी स्पॉट प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का चालान करने के लिए हैडक्वार्टर से मशीनें मिली थी। इन्हें चलाने के लिए संबंधित कंपनी ने इंजीनियर द्वारा ट्रैफिक स्टाफ को डैमो और ट्रेनिंग देनी थी, लेकिन उनके आज तक न आने से ये डंप होकर रह गई है। प्रदेश में पहली बार इस तरह की पोर्टेबल साइज की मशीनें दी गई थीं।

पेट्रोल-डीजल के लिए अलग-अलग मशीनें

ट्रैफिक पुलिस को वाहनों का प्रदूषण चैक करने को पेट्रोल और डीजल वाली दो पॉल्यूशन मशीनें मई, 2013 में दी गई थीं। इनके जरिए दोनों तरह के इंजनों वाली हर सेगमेंट की गाडिय़ों का हाइवे और दूसरी जगहों पर प्रदूषण चैक होना था, जो गाडिय़ां तय मापदंड से ज्यादा प्रदूषण फैला रही होंगी, उनका ऑन दी स्पॉट ही चालान काटना था। डीजल मशीन का छोटा-मोटा डैमो दिया गया, लेकिन पेट्रोल का डैमो देने कोई नहीं आया। एक मशीन ट्रैफिक पुलिस के हवाले तो की गई, मगर इसका प्रॉपर इस्तेमाल नहीं हुआ। ज्यादातर गाडिय़ां पेट्रोल इंजन वाली हैं। मगर इसकी मशीन डिब्बे में बंद है।

बंद मशीन से कैसे कसेगा शिकंजा

सड़कों पर रोजाना हजारों वाहन धुआं छोड़ कर प्रदूषण फैला रहे हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए मशीनें दी गई, लेकिन जो मशीन लंबे अर्से से डिब्बे में बंद हो, उससे कार्यवाही कैसे हो सकती है। मशीन को गाड़ी के इंजन से जोड़ कर उसके प्रदूषण की मात्रा आंकी जाती है। गाड़ी नियमों का उल्लंघन कर रही है या नहीं। यह मशीन से निकलने वाली स्लिप से पता चलता है। इसमें एक हजार रुपए तक के जुर्माना का प्रावधान है।

नहीं आया डैमो देने इंजीनियर

मशीनों को डैमो देने के लिए पुलिस ने हैडक्वार्टर को भी लिखा, लेकिन 8 माह बाद भी संबंधित कंपनी का इंजीनियर इसके लिए नहीं आया। मशीन पुलिस लाइन में डंप पड़ी है।

पॉल्यूशन मशीन का डैमो देने के लिए दोबारा संबंधित कंपनी को इंजीनियर भेजने के लिए कहा जाएगा ताकि इनका स्पॉट पर उपयोग किया जा सके।

वीना भारती, एसपी हमीरपुर