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गिरिपार को एसटी क्षेत्र, ददाहू को बनाओ तहसील
भास्कर न्यूज - रेणुकाजी
जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने का मुद्दा एक बार फिर गर्मा चुका है। इस मुद्दे को जहां शिमला संसदीय सीट के सांसद वीरेंद्र कश्यप भुनाने में लगे हैं, वहीं कांग्रेसी नेता भी इस मांग को पूरा करवाने के लिए जोर लगा रहे हैं। यह मुद्दा भारत सरकार के अधीन है। इसे प्रदेश सरकार पूरा नहीं कर सकती। फिलहाल प्रदेश सरकार ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया है। जानकारी के अनुसार गिरिपार क्षेत्र में हाटी जनजाति की करीब सवा दो लाख की आबादी है। भारत सरकार द्वारा 1968 में गिरिपार के साथ लगते उत्तराखंड के जोनसार बाबर को जनजातिय क्षेत्र को दर्जा दिया था। 1979 में केंद्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य ठाकुर सेन नेगी ने भी गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने की सिफारिश की थी। गिरिपार क्षेत्र के तहत सिरमौर जिला के तीन विधानसभा क्षेत्रों का हिस्सा आता है। इनमें शिलाई, रेणुका व राजगढ़ शामिल हैं। सभी लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिलाने की मांग करते रहे हैं। मगर अभी तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
20 पटवार सर्किल
कोटी-धीमान से लेकर बेचड़बाग धारटीधार में थाना कसोगा, बिरला सहित करीब 25 पटवार सर्किल ददाहू तहसील में मिलना चाहते हैं। फिलहाल यहां करीब 20 पटवार सर्किल काम कर रहे हैं। रेणुकाजी मेले के दौरान भी क्षेत्र के लोगों ने सीपीएस विनय कुमार के माध्यम से यह मांग मुख्यमंत्री के समक्ष उठाई थी, मगर मेले के दौरान भी ददाहू को तहसील का दर्जा नहीं मिल सका।
पीएम ने मांगी है रिपोर्ट
शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद वीरेंद्र कश्यप ने बताया के वह गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिलाने के लिए बहुत प्रयास कर चुके हंै। क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ वह प्रधाानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिले थे। प्रधानमंत्री ने हाटी समुदाय के इस मांगपत्र पर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बताया जाता है कि गिरिपार का सर्वेक्षण कर चुकी हिमाचल सरकार की नोडल एजेंसी ने भी केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है। इससे यह मुद्दा पूरा होने की आस जल्द पूरी होती नजर नहीं आ रही है।
लोस चुनाव से पहले लोगों ने फिर उठाई आवाज
सांसद कश्यप सहित कांग्रेस ने उठाई है मांग