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चास प्रखंड कार्यालय के समक्ष पंचायत प्रतिनिधियों ने दिया धरना

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बोकारो
पंचायत प्रतिनिधियों ने २१ सूत्री मांगो को लेकर चास प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना दिया। सुबह ११ बजे से तीन बजे तक धरना देने के बाद भी उनका ज्ञापन लेने वाला कोई अधिकारी प्रखंड कार्यालय में नहीं था। इससे गुस्साए पंचायत प्रतिनिधियों ने एनएच २३ को जाम कर दिया। लगभग आधा घंटा जाम रहने के बाद बीडीओ विजेंद्र कुमार ने जाम स्थल पर आकर ज्ञापन लिया। इस दौरान पंचायत प्रतिनिधि काफी गुस्से में थे। बीडीओ ने कहा कि वे सुबह प्रखंड कार्यालय आए थे। लेकिन बैठक में भाग लेने के लिए डीसी आफिस चले गए थे। उन्होंने मांग पत्र लेते हुए आश्वासन दिया कि उनकी मांगो को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद जाम हटा लिया गया।
धरना में जमकर कोसा सरकार को
धरना के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार को जमकर कोसा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार पंचायतों को पूर्ण अधिकार देना नहीं चाहती। ३२ वर्ष बाद चुनाव हुए। लोगों में आशा जागी कि गांवों की सरकार बनी तो कुछ विकास होगा, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी पंचायतों को अधिकार देने के बजाय उनके साथ छल ही किया जा रहा। पंचायत प्रतिनिधियों को मानदेय देने के नाम पर उनकी तौहिन की जा रही है। मुखिया को एक हजार रुपये और उप मुखिया को पांच सौ रुपये मानदेय दिया जा रहा है। इससे ज्यादा तो वृद्धा पेंशनधारियों को मिलता है। वक्ताओं ने कहा कि अभी तो शुरूआत है, अधिकार के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। धरना में मुखिया गणेश ठाकुर, अरूण महतो, युधिष्ठिर महतो, राजेश रवानी, बारिफ अंसारी, निता देवी, वनिता देवी, रेखा देवी, मधु चंदा, पिंकी देवी, सुनीता देवी, सुरधनी देवी, फालगुनी भट्टाचार्या, नागेंद्र मोदी, परशुराम महतो, पूरन महतो, अर्जुन रजवार, तारा देवी, कमला देवी, पार्वती देवी, खुदा नवाज, जगती देवी आदि शामिल थे। धरना का संचालन मुखिया विनोद घोषाल कर रहे थे। धरना के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने बीडीओ को २२ सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें बीआरजीएफ की ६० प्रतिशत राशि पंचायत को देने, पंचायत सेवक को पंचायत सचिवालय में प्रतिदिन बैठने, हल्का कर्मचारियों के सप्ताह में चार दिन पंचायत सचिवालय में बैठने, अतिरिक्त बीपीएल से वंचित बाधाडीह, बांधगोड़ा, सोनाबाद और माराफारी पूनर्वास पंचायत को बीपीएल सूची में शामिल करने, पंचायत सचिवालयों में रात्रि प्रहरी और कंप्यूटर आपरेटर बहाली करने, माराफारी और पिंड्राजोरा को प्रखंड का दर्जा देने सहित
कई मांगें की गई।