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पेट की आग ने खतरे को किया दरकिनार

8 वर्ष पहले
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लिलटेन अंगारपथरा में भू-धंसान के बाद लोगों में अफरातफरी मची हुई थी। प्रभावित परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में था। ऐसी विपरीत परिस्थिति में पेट की आग ने सभी खतरे को दरकिनार कर दिया। मंगलवार को लिलटेन अंगारपथरा में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। एक प्रभावित का घर धंसने के बावजूद वे पेट की आग को शांत करने के लिए काम करते रहे। वह सारे खतरों और बाहर जुटी भीड़ से बेखबर इडली बनाने में व्यस्त दिखे। पूछने पर बताया कि पहले रोजगार उसके बाद ही कुछ।

क्योंकि उन्हें मालूम है कि बीसीसीएल अधिकारी केवल आश्वासन देकर चले जाएंगे।

स्कूल के भविष्य पर लगा प्रश्नचिह्न

लिलटेन अंगारपथरा में भू-धंसान की घटना के बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय भी प्रभावित हो गया है। उक्त विद्यालय में लगभग ५० बच्चे पढ़ते हैं। भू-धंसान के बाद विद्यालय के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ऐसे बताया जाता है कि उक्त इलाका पूर्व से ही प्रभावित है और डेंजर जोन में विद्यालय संचालित है। हालांकि अब यहां कक्षा संचालित होने की संभावना कम ही दिख रही है। विद्यालय के शिक्षक भी यहां पढ़ाने से कतराने लगे हैं।



इनके परिवार हुए बेघर

श्रीराम साव, रंजीत साव, नारायण साव, दुर्गा साव, हरेंद्र सिंह, गणेश मिस्त्री, प्रेमन गोप, हुबलाल गोप, त्रिलोकी साव, लक्ष्मण साव, भगवान दास, मेहंदी यादव, परमेश्वर यादव, आदिति पासवान, ज्ञान यादव, अनिल यादव और रामलाल विश्वकर्मा।



जोरदार आवाज से मची अफरातफरी

रात करीब १:३० बजे जोरदार आवाज से लिलटेन अंगारपथरा के लोग हड़बड़ा कर नींद से जागे। घरों से बाहर निकलने पर उन्हें पता चला कि भू-धंसान हुआ है। अफरातफरी मच गई। लोग जरूरी और कीमती सामान उठाकर इधर-उधर भागने लगे। घरों की दीवारें दरकने लगीं। कुछ ही समय में १७ मकान खंडहर में बदल गए। डेढ़ दर्जन परिवार बेघर हो गए। उन्होंने किसी तरह ठिठुरते हुए रात गुजारी।

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विधायक मथुरा भी पहुंचे

टुंडी के विधायक मथुरा प्रसाद महतो भी भू-धंसान के प्रभावितों का हाल-चाल लेने लिलटेन अंगारपथरा पहुंचे। लोगों ने उनसे से वैकल्पिक व्यवस्था करने की गुहार लगाई। कोई स्थायी समाधान नहीं निकलने पर लोगों ने रैक लोडिंग कार्य को ठप कर दिया।

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