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पैसे लेकर प्रमाण पत्र बनाने वाले हटाए जाएंगे : सीएस
जिला स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया, शुरुआती जांच में डॉक्टर और कुछ कर्मियों पर संदेह
भास्कर इम्पैक्ट
भास्कर न्यूज - धनबाद
सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा पैसे लेकर स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनाने के मामले के भंडाफोड़ के बाद की जांच सीएस अरुण कुमार सिन्हा खुद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह मसला काफी गंभीर है। इसमें कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आई है। जांच में जिस किसी को दोषी पाया जाएगा, उसे तुरंत हटाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर और डीलिंग क्लर्क पर संदेह
सिविल सर्जन के ड्राइवर द्वारा 500 रुपये लेकर स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनाने के मामले में एक चिकित्सक और डीलिंग क्लर्क की भूमिका संदेहास्पद है। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों की मिलीभगत से ही बिना जरूरी कागजात के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बनाए जा रहे थे। हर दिन 10-12 ऐसे सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं।सभी सर्टिफिकेट पर एक ही मेडिकल अफसर के हस्ताक्षर हैं। कई चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
कार्यालय में नहीं दिखा ड्राइवर
स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाने वालों की बुधवार को भी काफी भीड़ थी। हालांकि, अब तक कम पैसे लेकर तत्काल काम कराने वाला ड्राइवर हां से लापता था। सर्टिफिकेट बनवाने वाला डीलिंग क्लर्क पूरे दिन अपनी कुर्सी पर नजर आया। इससे पहले तक वह वहां कम ही दिखता था। वह पूरे दिन आने वाले सभी लोगों को जांच कराने के लिए पीएमसीएच भेजता रहा। सूत्रों ने बताया कि यहां यह रैकेट काफी लंबे समय से चल रहा था।
कार्यालय में नहीं दिखा ड्राइवर
स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाने वालों की बुधवार को भी काफी भीड़ थी। हालांकि, अब तक कम पैसे लेकर तत्काल काम कराने वाला ड्राइवर हां से लापता था। सर्टिफिकेट बनवाने वाला डीलिंग क्लर्क पूरे दिन अपनी कुर्सी पर नजर आया। इससे पहले तक वह वहां कम ही दिखता था। वह पूरे दिन आने वाले सभी लोगों को जांच कराने के लिए पीएमसीएच भेजता रहा। सूत्रों ने बताया कि यहां यह रैकेट काफी लंबे समय से चल रहा था।
भास्कर न्यूज - धनबाद
सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा पैसे लेकर स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनाने के मामले के भंडाफोड़ के बाद की जांच सीएस अरुण कुमार सिन्हा खुद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह मसला काफी गंभीर है। इसमें कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की बात सामने आई है। जांच में जिस किसी को दोषी पाया जाएगा, उसे तुरंत हटाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।