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सुख-दुख एक समान, दोनों का आनंद उठाएं : साध्वी पद्महस्ता
भास्कर न्यूज - धनबाद
गोल्फ ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन साध्वी पद्महस्ता ने जीवन के यथार्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां सुख है, वही दुख भी है। मनुष्य को दोनों का आनंद उठाना चाहिए। यही परम आनंद है। सुख की चाह अधिक दिनों तक नहीं रह पाता है। मृत्यु के बाद सब कुछ यहीं रह जाता है। सब कुछ जानते हुए भी मानव हमेशा सुख की चाह में भटकता रहता है। धन कमाने से लेकर विवाह, संतान सुख, दो-चार मंजिला भवन का निर्माण सभी काम मानव अपने सुख के लिए करता है। दुख के लिए कभी कोई कुछ नहीं करता है, लेकिन सुख मिलने के बाद भी मनुष्य को दुखों से छुटकारा नहीं मिल पाता है। सब कुछ रहते हुए भी जीवन में दुख क्यों आता है, इसे जानने का कभी किसी ने प्रयास नहीं किया। साध्वी ने कहा कि दुख का कारण यह संसार है, जिसे शास्त्रों में मृगतृष्णा की संज्ञा दी गई है। मानव अपने वास्तविक सुख को खोजना ही नहीं चाहता है और न ही कभी इसके लिए प्रयास करता है।