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चोर रिचार्ज, पुलिस डिस्चार्ज

8 वर्ष पहले
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धनबाद :९४३१३७५९१६

पुलिस की कार्रवाई निराशा जनक है। लगातार चोर बैट्री दुकानों को शिकार बना रहे हैं और पुलिस चुप बैठी है। वह गिरोह तक पहुंचने के बजाए, मामले को फर्जी साबित में अधिक पसीना बहाती है। सुरक्षा के लिए अब बैट्री दुकानदार स्वयं आगे आएंगे। निजी गार्ड रखेंगे और सीसीटीवी कैमरा लगाएंगे। एसपी से मिलकर पुलिसिया जांच पर नाराजगी जताई जाएगी। दिनेश हेलीवाल, मालिक, सनराइज बैट्री

चोरों ने रात की नींद हराम कर दी है। दुकान की सुरक्षा उन्हें हर पल सताती है। पुलिस अगर गिरोह तक नहीं पहुंची तो वे कांड को अंजाम देते रहेंगे। पुलिस मामले को गंभीरता से ले, ताकि बैट्री दुकानदार भय मुक्त वातावरण में कारोबार कर सकें। रवींद्र सिंह राजपूत, मालिक, देव बैट्री

क्या कहते हैं बैट्री कारोबारी

1. बंगाल में खपाई जा रही बैट्री : शहर में सक्रिय बैट्री चोरों का तार बंगाल से जुड़ा है। धनबाद से चुराई गई बैट्री बंगाल में खपाई जा रही है। बंगाल के दुर्गापुर और कुल्टी में इसके खरीदारों का अड्डा है। चोरी की बैट्री को बंगाल में आधी कीमत मिलती है। 20 हजार की बैट्री को बंगाल का बाजार 10 हजार देता है और उसे फिर 16 हजार में बेच देता है।

2. सेंधमारी के उस्ताद : गिरोह में पांच सदस्य हैं। इनमें दो सेंधमारी का उस्ताद है। पिछले सात दिनों में गिरोह ने सेंधमारी कर वारदात को अंजाम दिया। सेंधमारी का स्टाइल एक ही है। वैसे पुलिस शहर के तीन चोरों को सेंधमारी के लिए जानती है। सुनील, मुरारी और मनोज। यह तीनों शहर में मौजूद भी हैं।

3. बैट्री के जानकार : गिरोह के सदस्यों में कुछ को बैट्री का ज्ञान है। मतलब यह है कि उन्हें पता है कि किस बैट्री की मांग बाजार में अधिक है और किस बैट्री की मांग कम। गिरोह बैट्री का ब्रांड देख कर चोरी करता है। मां तारा इंटर प्राइजेज में उन्होंने सिर्फ एक खास कंपनी की बैट्री चुराई। जबकि वहां अन्य कई कंपनियों का बैट्री रखा हुआ था।

4. ऑटो से ढोते हैं सामान : गिरोह बैट्री के सभी दुकानों को जानता है। किस बैट्री दुकान में कितना सामान उनके हाथ लगेगा, यह भी उन्हें पता है। वह चोरी के लिए पहले दुकान तय करते हैं और फिर उसके अनुसार मालवाहक गाड़ी लेकर कांड को अंजाम देने जाते हैं। बैट्री को मालवाहक में लाद कर ले जाते हैं।

...और जानिए चोरी का सच

...ऐसा है चोरों का आतंक



बैट्री दुकान का नाम दुकान स्थल कितने की चोरी किस थाने में केस

सरफु बैट्री दुकान गोधर 1.50 लाख केंदुआडीह

पावर बैट्री दुकान मटकुरिया 1 लाख बैंकमोड़

स्टार बैट्री दुकान मटकुरिया 20 हजार एफआईआर नहीं

आनंद बैट्री दुकान मटकुरिया 20 हजार एफआईआर नहीं

शर्मा बैट्री दुकान मटकुरिया 10 हजार एफआईआर नहीं

लडऩ का बैट्री दुकान झरिया 6 लाख झरिया

उजाला बैट्री दुकान मटकुरिया रोड 7 लाख बैंकमोड़

मां तारा इंटर प्राइजेज सरायढेला 5 लाख सरायढेला



1. मामलों पर गंभीर नहीं : पुलिस बैट्री चोरी की वारदात को गंभीरता से नहीं लेती। वह इस चोरी को मामूली चोरों का करतूत मान कर बैठ जाती है। जमादार स्तर के अधिकारी अपने स्तर से जांच करते हैं। इंस्पेक्टर स्तर से ऊपर के अधिकारी मामले की समीक्षा नहीं करते।

2. मान बैठते हैं फर्जी वारदात : पुलिस को ऐसा लगता है कि इन चोरियों के पीछे दुकानों का फर्जीवाड़ा है। वह बीमा कंपनी से दावा प्राप्त करने के लिए ऐसा करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि जिन दुकानों में चोरी हुई, उसमें अधिकांश का बीमा नहीं था।

3. न क्षमता, न इच्छा शक्ति : पुलिस गिरोह के करीब पहुंचने की कोशिश नहीं करती। अधिकांश अनुसंधानकत्र्ताओं में न तो गहराई तक जाने की क्षमता है और न ही इच्छा शक्ति। वह जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।



क्यों है पुलिस विफल

21 जनवरी को आइएसएम गेट के पास बैट्री दुकान में चोरी दीवार में सेंध मार कर की गई थी।

कारोबारियों का बढ़ा सुरक्षा खर्च

लगातार हो रही टारगेटेड चोरी से परेशान बैट्री कारोबारियों का विश्वास पुलिस पर से उठता जा रहा है। कारोबारी अपने स्तर से सुरक्षा की रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसे लेकर बुधवार को धनबाद जिला बैट्री डीलर एसोसिएशन की बैठक भी हुई। बैठक में एसोसिएशन ने डीलरों को दुकान पर निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने और सीसीटीवी कैमरा लगाने की अपील की है। बैट्री डीलर इस पर अमल भी कर रहे हैं। हर दुकानदार अपने स्तर से दुकान को चोरों से बचाने में जुटा है।



ञ्चअशोक कुमार

कोई ताले पर मार रहा है ताला तो कोई खिड़की बंद कर चुनवा रहा दीवार। अपनी पेट काट कर किसी ने सुरक्षा गार्ड लिया तो किसी ने लगवाया सीसीटीवी कैमरा। रात में दुकान बंद कर जब वह घर जाते हैं, तो भगवान से रक्षा की गुहार लगाते हैं। बैट्री के कारोबारियों की यह स्थिति यूं ही नहीं है। दरअसल पुलिस की नाकामी ने बैट्री चोरों का हौसला कुछ इस कदर बढ़ा दिया कि बैट्री कारोबारियों की नींद हराम हो गई। पिछले तीन माह में बैट्री चोर उत्पात मचा कर कारोबारियों की जेब पर कहर बरपा रहा हैं। तीन माह में चोरों ने 8 वारदातों को अंजाम दिया। इन वारदातों से चोरों ने 25 लाख की संपत्ति बैट्री। एक तरफ जहां उजाला, मां तारा और लडऩ जैसे बड़े बैट्री दुकानों के मालिकों को एक ही रात में 5 लाख से अधिक का झटका दिया, वहीं दूसरे तरफ पावर और आनंद जैसी बैट्री दुकानों को भी हजारों का नुकसान पहुंचाया। बैट्री कारोबारी चोरों के आतंक से त्राहिमाम कर रहे हैं। रही बात पुलिस की, तो उनकी कार्यशैली कारोबारियों के जख्म पर नमक का दर्द महसूस करा रही है। एक के बाद एक वारदात को अंजाम देने के बाद भी गिरोह की पहचान नहीं हो पाई।



कभी सेंध मारी तो कभी शटर तोड़ा। कभी छोटी बैट्री चुराई तो कभी बड़ी। चोरी की बैट्री कभी ऑटो से ले गए तो कभी 407 ट्रक से। शहर के अंदर बैट्री चोरों ने पिछले तीन माह में जैसा चाहा, वैसा किया। चोरी की बैट्री से चोर चार्ज होते गए और पुलिस उनके कारनामों के आगे डिस्चार्ज होती गई। डकैती और हत्या जैसी वारदातों को रोकने में विफल रही धनबाद पुलिस इन चोरों के आगे भी नतमस्तक है। एक सप्ताह के अंदर चोर शहर के बीचों - बीच दो वारदात कर चलते बने, पर इसका शिकन पुलिस के चेहरे पर नहीं। उजाला बैट्री में हुई चोरी कांड को फर्जी बताने में बैंकमोड़ पुलिस ने पांच दिन बर्बाद कर दिए, वहीं मां तारा इंटर प्राइजेज में हुई चोरी के बाद पुलिस यह भी ठीक से तय नहीं कर पाई कि चोरी का स्थल किस थाना क्षेत्र में पड़ेगा। जो मामला सरायढेला थाने में दर्ज होना चाहिए था, वह सदर थाने में दर्ज हुआ। यह बताता है कि पुलिस इस कांड के अनुसंधान को लेकर कितनी गंभीर है।





तीन माह में 8 बैट्री दुकानों में लगाई सेंध ...लेकिन हर बार पुलिस के हाथ खाली

सुरक्षा का खोखला इंतजाम

सीधी बात

 तीन महीने में आठ बैट्री दुकानों में चोरी हो चुकी है और एक भी पकड़ा नहीं गया है?

 पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जल्द ही गिरोह तक पुलिस पहुंच जाएगी।

 अब तक पुलिस ने क्या किया, कुछ खास तो दिखाई नहीं दे रहा है?

 जांच चल रही है, संदिग्धों की तलाश है।

 व्यवसायी पुलिस की अबतक की कार्रवाई से असंतुष्ट क्यों हैं?

 दुकान भेदने वाले गिरोह को पकड़ा जाएगा। व्यवसायियों को भरोसा रखना होगा।

अमित कुमार, डीएसपी, धनबाद

दुकान भेदने वाले गिरोह को जल्द पकड़ा जाएगा

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