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ए टू जेड के समर्थक पार्षदों को झटका, वापस नहीं होगा टर्मिनेशन
भास्कर न्यूज - धनबाद
ए टू जेड के पक्ष में लॉबिंग करने और उसे फिर से एक मौका देने की मांग कर रहे पार्षदों को करारा झटका लगा है। निगम बोर्ड की गुरुवार को डीआरडीए सभागार में हुई बैठक में ज्यादातर पार्षदों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने निगम की सफाई एजेंसी ए टू जेड के टर्मिनेशन को सही ठहराया। इससे वैसे लोगों को भी मुंह की खानी पड़ी, जो पर्दे के पीछे रहकर कंपनी की पैरवी कर रहे थे।
बैठक में कतरास अंचल के कुछ पार्षदों ने खुलकर ए टू जेड का पक्ष लिया। उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी को फिर से बहाल नहीं करने पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सरकार से मिली राशि मार्च के बाद वापस हो जाएगी।महेश पासवान, विनोद गोस्वामी आदि के इस प्रस्ताव का निर्मल मुखर्जी, मदन महतो, प्रियरंजन और लक्ष्मी देवी ने विरोध किया। कहा कि जब बोर्ड ने कंपनी को टर्मिनेट कर दिया है, तो उसे फिर से काम पर नहीं रखा जा सकता। इस पर हंगामा शुरू हो गया।
दो खेमों में बंटे पार्षद
ए टू जेड के मुद्दे पर पार्षद दो खेमों में बंटे दिखे।विरोध और समर्थन में हो रहे हंगामे को देख नगर आयुक्त बालमुकुंद झा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि पहले कंपनी ने ही काम बंद करने की चेतावनी दी थी।बोर्ड ने उसे 30 दिसंबर को टर्मिनेट किया, जबकि कंपनी ने 21 दिसंबर को ही निगम और नगर विकास विभाग को काम बंद करने का नोटिस भेज दिया था।
बैठक के दौरान मौजूद पार्षद और अन्य।
लेबर पेमेंट पर हुआ हंगामा
बैठक में बकाया लेबर पेमेंट को लेकर भी पार्षदों ने हंगामा किया। वे मेयर, डिप्टी मेयर के आसन तक पहुंच गए। नगर आयुक्त ने कहा कि बिना जांच कराए वह भुगतान नहीं कर सकते हैं। इस पर कुछ पार्षद बैठक छोड़कर जाने लगे, लेकिन उन्हें अन्य पार्षदों ने रोका। बाद में नगर आयुक्त ने कहा कि बिल जांच की रिपोर्ट एक सप्ताह में मिल जाएगी। उसके बाद पेमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
दो माह बाद से यूजर
चार्ज की वसूली
नगर आयुक्त ने कहा कि रांची की तर्ज पर धनबाद में भी सोसाइटी बनाकर उससे सफाई कराई जा सकती है। दो माह बाद लोगों से यूजर चार्ज की वसूली शुरू की जाएगी।इस पर पार्षदों ने सोसाइटी के बजाय 10 सफाईकर्मी रखने का सुझाव दिया। साथ ही यूजर चार्ज वसूलने का काम निगमकर्मियों से कराने की बात कही। आखिर में डिप्टी के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
... तो कंपनी को देने होंगे त्र4.56 करोड़
नगर आयुक्त ने बताया कि ए टू जेड ने निगम पर 4.56 करोड़ रुपए के बकाए का दावा ठोंका है। उसे फिर से काम देने का मतलब है कि यह राशि उसे देनी होगी और उसकी शर्तों पर काम कराना होगा।नगर आयुक्त ने बताया कि विभागीय स्तर पर री-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कंसल्टेंट की भी बहाली की जा चुकी है। इसके बाद कंपनी के समर्थक पार्षद शांत हो गए।
डिप्टी मेयर के फॉर्मूले पर बनी सहमति
निगम बोर्ड की बैठक में री-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी होने तक वार्डों में साफ-सफाई के लिए को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनाने का प्रस्ताव पास हो गया। यह भी तय हुआ कि जो पार्षद अपने वार्ड में सोसाइटी नहीं बनाना चाहते, वे सफाईकर्मी रखकर सफाई करा सकते हैं। सफाई उपकरण और दो माह की राशि निगम की ओर से दी जाएगी। स्टैंडिंग कमेटी में पहले ही पारित हो चुके इस प्रस्ताव को बोर्ड के सामने नगर आयुक्त ने रखा। इसका पार्षदों ने पहले विरोध किया। इसके बाद डिप्टी मेयर नीरज सिंह ने सोसाइटी बनाने और सफाईकर्मी रखने का विकल्प चुनने का फैसला पार्षदों पर ही छोड़ देने का प्रस्ताव रखा। इसका सभी पार्षदों ने समर्थन किया।
> 13वें वित्त आयोग के तहत ली जाने वाली योजनाओं की मंजूरी। > नए सिरे से संवेदकों का होगा निबंधन। > वार्ड स्तर पर सहकारी समितियों का गठन। > ए टू जेड से लिए जाएंगे 60 मालवाहक टेंपो। > सभी वार्डों में लगेगी सोलर स्ट्रीट लाइट। >राजीव आवास योजना की मंजूरी। > हीरापुर में 2.5 करोड़ रुपए से बनेगा पार्क। > विनोद नगर में 2 करोड़ रुपए से बनेगा निगम का टाउन हॉल। > करकेंद स्थित नेहरू पार्क का जीर्णोद्धार। > आरा मोड़ से वासेपुर के बीच सड़क का निर्माण। > निगम क्षेत्र में दो स्थानों पर विद्युत शवदाह गृह का निर्माण। > बैंकमोड़ से गोधर, पुटकी तक एलईडी लाइट लगाई जाएगी।
ये प्रस्ताव हुए पारित
निगम बोर्ड की बैठक में सफाई के लिए को-ऑपरेटिव सोसाइटी के गठन पर लगी मुहर