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मंच पर जीवंत हुई दंगों के शिकार परिवार की त्रासदी

7 वर्ष पहले
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> आईएसएम में शुरू हुआ वर्ष 1980 के बाद भारतीय महिला कवयित्रियों की लिखी कविताओं पर दो दिवसीय सेमिनार
भास्कर न्यूज - धनबाद
आईएसएम में गुरुवार को वर्ष १९८० के बाद महिला कवयित्रियों की लिखी कविताओं पर आधारित दो दिवसीय सेमिनार शुरू हुआ। पहले दिन रात में छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत आईएसएम ड्रमेटिक्स क्लब की ओर से नाटक ‘आबरू’ के मंचन से हुई। नाटक की पृष्ठभूमि आजादी के पहले भारत में हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच हुए दंगों पर आधारित थी। इसमें पंजाब के एक मुस्लिम परिवार की कहानी दिखाई गई। आईएसएम छात्रों ने झारखंड के लोक नृत्यों की भी प्रस्तुति की। शास्त्रीय नृत्य और बॉलीवुड के गीतों पर डांस के भी कार्यक्रम हुए।




महिला कवयित्रियों की हुई उपेक्षा

1980 के बाद महिला कवयित्रियों की उपेक्षा हुई, जबकि उन्होंने पर्यावरण, समाज में महिलाओं का स्थान, स्त्रीत्व विषय पर एक से बढ़ कर एक कविताएं लिखीं। आईएसएम के गोल्डन जुबली हॉल में डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमिनिटी एंड सोशल साइंस की ओर से आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने यह बात कही। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि इलेक्ट्रो स्टील के निदेशक आरबी सिंह, आईआईटी दिल्ली के प्रो आरबी नायर और आईएसएम के निदेशक डॉ डीसी पाणिग्रही थे। मौके पर डॉ रजनी सिंह, प्रो संयुक्ता दासगुप्ता आदि मौजूद थे।