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भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख यात्रा 5 जून से

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - धनबाद
राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के बैनर तले 5 से 30 जून के बीच अलख यात्रा निकाली जाएगी। इसके जरिए भय, भूख और भ्रष्टाचार की वजह से बढ़ रहे जनाक्रोश को रचनात्मक दिशा देने की कोशिश की जाएगी। आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र के मुताबिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में ऊर्जावान नेतृत्व की तलाश ही इस यात्रा का उद्देश्य है।
शैलेंद्र ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जन, जानवर और स्वाभिमान के मुद्दों को लेकर वर्ष 1855 में संथालों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था। इन मुद्दों को आज के संदर्भ में परिभाषित करने की जरूरत है। आज डेमोक्रेसी के नाम पर कॉरपोरेटोक्रेसी की जा रही है। अलख यात्रा के जरिए ऐसी शक्तियों के खिलाफ आवाज बुलंद की जाएगी। यात्रा की शुरुआत 5 जून को सिद्धू-कान्हू के गांव भोगनाडीह से होगी। केएन गोविंदाचार्य, पीवी राजगोपाल समेत कई लोग वहां पहुंचेंगे। वहां संथालों की रीति-रिवाज के मुताबिक, सिद्धू-कान्हू के आंगन की मिट्टी एक कलश में स्थापित की जाएगी। इसी कलश को लेकर यात्रा शुरू होगी।

इसमें 100 चुने हुए पदयात्री शामिल होंगे। वे संथालपरगना के सभी जिलों से होते हुए 30 जून को चेतना महाविद्यालय पहुंचेंगे। वहां इस कलश को स्थापित कर शोषण मुक्त और समृद्ध झारखंड के लिए संघर्ष का संकल्प लिया जाएगा।
अलख यात्रा की तैयारियों पर बुधवार को चेतना महाविद्यालय परिसर में हुई राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन और एकता परिषद में विचार-विमर्श किया गया। इसमें एकता परिषद के झारखंड समन्वयक राम स्वरूप, पंचम भाई, डॉ संजय उपाध्याय, विलियम हांसदा, विश्वनाथ हांसदा, तुरसा बेसरा, ज्योतिलाल मरांडी, प्रसून हेम्ब्रम, सुशील मंडल, सहदेव मुर्मू, हेनोलाल हेम्ब्रम, रूपलाल हेंब्रम, राकेश कुमार, गणेश मुर्मू आदि मौजूद थे।



: राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के बैनर तले सिद्धू-कान्हू के गांव भोगनाडीह से शुरू होगी 26 दिनों की यात्रा