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डॉक्टर हैं, दवाएं भी...लेकिन मरीजों के लिए दोनों बेकार

8 वर्ष पहले
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अमित रंजन . धनबाद

डॉक्टर भी हैं और दवाएं भी। पर दोनों के बीच इतनी दूरी है कि डॉक्टर दवाओं का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। विभागीय पेचीदगी में फंसे डॉक्टर और दवाएं दोनों बेकार पड़े हैं। यह हाल है जिला आयुष कार्यालय और स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत जिले में भेजे गए डॉक्टरों का। दोनों के बीच विभाग ने नियमों की लकीर खींच रखी है। इसका नतीजा यह है कि मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। उनका इलाज नहीं हो पा रहा है। जहां उनके इलाज के लिए डॉक्टर हैं, वहां दवाएं ही नहीं है। डॉक्टर मरीज को देख भी लेते हैं, तो वे दवाएं नहीं दे पाते। न सरकार ने उन्हें दवाएं दी हैं और न ही वे आयुष कार्यालय से दवाएं ले सकते हैं।

यहां दवा है, डॉक्टर नहीं - जिला आयुष कार्यालय में होम्योपैथ, आयुर्वेद और यूनानी के एक-एक डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं।एक पद जिला आयुष पदाधिकारी का भी है। यूनानी चिकित्सक के अलावा यहां सभी पद रिक्त हैं। यूनानी चिकित्सक डॉ अहमद सईद जमाली को ही जिला आयुष पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। इस कारण डॉ जमाली कार्यालय के कार्यों में ही व्यस्त रहते हैं। इसलिए आयुष चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ता है। हालांकि दवाओं की कमी नहीं है। तीनों चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं की भरमार है। पर वे मरीजों के लिए बेकार साबित हो रही हैं।



एनआरएचएम के तहत चलने वाले स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के लिए जिले के विभिन्न प्रखंडों में सात डॉक्टर नियुक्तकिए गए। डॉ मीनाक्षी दुबे एलोपैथ की हैं, जबकि डॉ अनुपमा सिंह, डॉ शुचिस्तिमा भट्टाचार्या, डॉ रंजू कुमारी, डॉ गालिब हुसैन, डॉ संजय कुमार राय और डॉ दीपक कुमार दास आयुष के डॉक्टर हैं। इनमें से एक ने बताया कि सरकार ने दवाएं नहीं दी हैं। इस कारण वे मरीजों को नहीं देख पाते।

यहां डॉक्टर हैं, दवा नहीं

वर्ष 2012-13 में ही खरीदी गई थीं दवाएं - जिला आयुष चिकित्सालय के लिए वर्ष 2012-13 में ही दवाएं खरीदी गई थीं। जब तक यहां डॉक्टर थे, दवाएं मरीजों को दी जाती थीं। अब डॉक्टर रिटायर हो चुके हैं। उनकी जगह सरकार ने दूसरे डॉक्टर भेजे ही नहीं। इस वजह से दवाएं यहां बेकार पड़ी हुई हैं।

औसतन 100 मरीज आते थे प्रतिदिन

एक कर्मी ने बताया कि चिकित्सालय में पहले हर दिन औसतन 100 मरीज आते थे। जैसे-जैसे डॉक्टर रिटायर होते गए, मरीजों की संख्या कम होती चली गई। मरीज तो अब भी आते हैं, पर डॉक्टर न होने के कारण यहां उनका इलाज नहीं हो पाता।

॥आयुष चिकित्सालय में दवा होते हुए भी उनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। यहां डॉक्टर ही नहीं हैं। अपने स्तर से मैंने कुछ वैकल्पिक व्यवस्था तो की है, पर वह कारगर नहीं हो रही है।डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए कई बार सरकार को पत्र लिखा गया है, लेकिन कोई पहल होती नहीं दिख रही। मेरे वश में कुछ नहीं है। - डॉ अहमद सईद जमाली, जिला आयुष पदाधिकारी



जिला आयुष चिकित्सालय में मरीजों का नहीं होता इलाज, स्कूल हेल्थ प्रोग्राम का भी बुरा हाल