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बेहतर कल की उम्मीद छोड़ी नहीं है : कर्मकार
भास्कर न्यूज - जमशेदपुर
आजाद हिंद फौज ((इंडियन नेशनल आर्मी)) के सिपाही रहे कर्नल सौमेंद्र कर्मकार की बूढ़ी आंखों में अब भी बेहतर कल की उम्मीद है। वे कहते हैं- ‘नेताजी ((सुभाष चंद्र बोस)) ने जिस भारत का सपना देखा था, वह आज भी अधूरा है। मैंने उस सपने का दामन नहीं छोड़ा है, क्योंकि सपने के मरने का मतलब है उम्मीद का खत्म हो जाना।’
बकौल सौमेंद्र, आज कोई नेता नहीं रहा। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने देश में नई उम्मीद जगाई है। 86 वर्षीय कर्मकार टाटा मोटर्स से रिटायर होने के बाद बिरसानगर में रहते हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे कलाम के हाथों सम्मानित हो चुके सौमेंद्र शहर से आजाद हिंद फौज के एकमात्र सिपाही हैं।
नेताजी की जयंती आज : आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे कर्नल सौमेंद्र ने बताई अपनी कहानी