नम आंखें और बंद थी जुबां
जमशेदपुर - पूर्व डिप्टी सीएम सुधीर महतो। खुशदिल और मिलनसार इंसान। उसकी सांसों की डोर टूट गई थी। रात 12.30 बजे उनकी एक झलक पाने को टाटा मुख्य अस्पताल में पूरा जमशेदपुर उमड़ पड़ा था। सबकी आंखें नम थीं। चेहरे पर स्तब्धता के भाव। अरे, यह क्या हो गया। मंगलवार को तो उन्हें गोपाल मैदान में मांदर बजाते और झूमते देखा था। जितने लोग, उतनी बातें। झामुमो विधायक विद्युत वरण महतो, रामदास सोरेन के अलावा भगीना लालटू महतो और काबलू महतो उनका शव लेकर टीएमएच पहुंटे। जिलाध्यक्ष रमेश हांसदा के साथ हजारों झामुमो समर्थक पहले से वहां थे। सुधीर दा की एक झलक पाने के लिए धक्का-मुक्की शुरू हो गई। साला संजय का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बहनोई नहीं रहे। पूर्व सांसद आभा महतो भी रोने लगी। उन्हें देख विद्युत वरण महतो, आस्तिक महतो और साधु चरण महतो भी बिलखने लगे। सुधीर महतो के भाई सुशील महतो और असित महतो बिलखते हुए कहते रहे कि भगवान ऐसा नहीं कर सकते।
टाटा मुख्य अस्पताल के इमरजेंसी में सुधीर महतो के शव को रखा गया। शव को शीतगृह ले जाने के लिए निकाला गया, तो लोग एक उन्हें छूने के लिए टूट पड़े। परिवहन मंत्री चंपई सोरेन उनके शव को लेकर बाहर निकले, तो झामुमो नेता राजू गिरि, गणेश चौधरी, पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां, कांग्रेस विधायक बन्ना गुप्ता, राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष रवींद्र झा, आनंद बिहारी दुबे ने शव को घेर लिया। सबके चेहरे गमगीन थे।