कर्म ही जीवन का लक्ष्य : सवितानंद
जमशेदपुर. जीवन का लक्ष्य ही कर्म है। इसलिए मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए। यह बातें आनंदमार्ग प्रचारक संघ द्वारा गदड़ा आश्रम में आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन शनिवार को आचार्य सवितानंद अवधूत ने कहीं। उन्होंने कहा कि शुभ कर्म का शुभ फल व दुष्कर्म का कुफल मिलता है। लेकिन, यह दोनों ही बंधन है। इसलिए बुद्धिमान मनुष्य कर्म तो करता है, लेकिन फल की इच्छा नहीं रखता है। क्योंकि, वह यह मानता है कि उसने सबकुछ परमात्मा की कृपा से किया है। इस अवसर पर आचार्य रविप्रकाशानंद अवधूत, प्रीतिशानंद अवधूत, ब्रजप्राणानंद अवधूत, ज्योतिमय ब्रह्मचारी, रमेंद्रानंद अवधूत समेत काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। अनुष्ठान का समापन रविवार को होगा।