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डाउनलोड करेंजमशेदपुर. मैट्रिक व इंटरमीडिएट की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के समय परीक्षक किसी भी बच्चे को दो या तीन नंबर से फेल न करें। इसके साथ ही परीक्षार्थियों को जीरो अंक देने से बचें। क्योंकि, इससे छात्रों का मनोबल गिरता है, जो उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। यह बातें जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा मंगलवार को दयानंद आर्य वैदिक इंग्लिश स्कूल में परीक्षा सुधार को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए झारखंड अधिविद्य परिषद ((जैक)) के चेयरमैन डॉ. आनंद भूषण ने कहीं। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षार्थी उत्तरपुस्तिका में प्रश्न का कुछ भी जवाब लिखता है, तो उस हिसाब से उसे नंबर दें और कंजूसी न करें।
आनंद भूषण ने कहा कि उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के दौरान यह समझें की वे अपने बच्चे का मूल्यांकन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में सुधार जैक का मुख्य लक्ष्य है। इसे लेकर कई योजनाएं शुरू की गई हैं। हमें उम्मीद है कि इसका रिजल्ट 2014 के परीक्षा परिणाम में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा का रिजल्ट जितना प्रतिशत होगा, मैं वेतन भी उतना ही लूंगा।
इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत आनंद भूषण ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस अवसर पर प्रभारी क्षेत्रिय शिक्षा उपनिदेशक भलेरियन टिर्की, को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्रिंसिपल आरके दास, ग्रेजुएट कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. उषा शुक्ला, जिला शिक्षा अधीक्षक इंद्रभूषण सिंह के अलावा सभी सरकारी उच्च विद्यालय व प्लस टू स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन भोलेंद्र पांडेय ने किया।
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