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अनुमान से तैयार किया जाता है रिपोर्ट : चटर्जी

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता -!- रांची
कुपोषण के मामले में लातेहार और साहेबगंज की स्थिति अलार्मिंग है। लातेहार में सबसे ज्यादा 50.5 प्रतिशत, जबकि साहेबगंज में 35.6 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़ा क्रेज ((कैंपेन फॉर राइट टू एजुकेशन इन झारखंड)) और क्राई ((चाइल्ड राइट्स एंड यू)) के संयुक्त तत्वावधान में किए गए सर्वे में सामने आया। मंगलवार को सामाजिक विकास केंद्र में राज्य को कुपोषण से मुक्त करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला में सर्वे रिपोर्ट का लोकार्पण किया गया।
क्राई की जनरल मैनेजर महुआ चटर्जी ने कहा कि ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्र में वजन करने की मशीन नहीं है। सरकार अनुमान के आधार पर रिपोर्ट जारी करती है, जो सही नहीं है। उन्होंने अगले चुनाव में कुपोषण और बाल अधिकार को राजनीतिक एजेंडा में शामिल करने की अपील की। क्रेज के स्टेट मैनेजर सुशांतो चक्रवर्ती एवं प्रोग्राम मैनेजर अभिजीत मुखर्जी ने भी इसका समर्थन किया। यूनिसेफ की दीपिका शर्मा ने कहा कि कुपोषण को दूर करने के लिए गांव की महिलाओं को अपने बच्चों के वजन पर ध्यान देना होगा। खाद्यान्न मामले के विशेषज्ञ बलराम और गणेश रेड्डी ने कहा कि आईसीडीएस में खाना बनाने का काम व्यवसाय बन गया है। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट द्वारा पिछले चार जनवरी को जो निविदा आमंत्रित की गई है, उसके अनुसार खाना बनाने का काम करने को इच्छुक महिला मंडल या एसएचजी को डेढ़ करोड़ की राशि सिक्यूरिटी डिपोजिट के तौर पर देनी होगी। इतनी बड़ी राशि वे कैसे दे सकती हैं। इससे साफ होता है कि सरकार इसमें भी बड़ी कंपनियों को ठेका देना चाहती है। डॉ. सुरंजन कुमार ने कहा कि आज 39 प्रतिशत बच्चे आंगनबाड़ी की सुविधा से वंचित हैं। यह समाज कल्याण विभाग की विफलता को दर्शाता है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुनीता कात्यायन ने कहा कि जब तक एक भी बच्चा कुपोषित रहेगा, हमारा विकास नहीं होगा। सेव द चिल्ड्रन के महादेव हांसदा ने कुपोषण को दूर करने के लिए गांव में जाकर लोगों को समझाने की बात कही।
मौके पर प्लान इंडिया के अघ्र्यो, क्रेज के जेरोम कुजूर एवं सौरभ कुमार ने भी विचार रखा। सम्मेलन में 18 जिलों के पंचायत प्रतिनिधि, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, माता समिति सदस्य सहित अन्य उपस्थित थे।