भागवत सुन प्रफुल्लति भक्त
भास्कर संवाददाता - रांची
भागवत निगम रूपी वृक्ष का पका हुआ फल है। भागवत रूपी फल कच्चा नहीं पका ही होता है। इस फल को तोड़ा नहीं जाता। भगवान कहते हैं निगम वृक्ष की नारायण रूपी सबसे ऊपरी डाली पर ब्रह्मा फिर नारद, और वेद व्यास की डाली है। तोता आकर अंतिम डाली पर बैठा और चोंच मार दी। उसके चोंच से फल मीठा हो गया। अर्थात जिस भागवत का गान शुकदेव जी ने अपनी वाणी से किया उसे मीठा होना ही है। यही भागवत की अमृत रूपी कथा का श्रवण करा रहा हूं। भागवत कथा की यह भूमिका आचार्य गौरव कृष्ण ने बुधवार की कथा में सुनाई।
श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति टांटी सिल्वे के तत्वावधान में ईईएफ मैदान में आयोजित कथा में आचार्य गौरव ने भागवत के विविध प्रसंग सुनाए। आयोजन के मुख्य यजमान शंकर प्रसाद और उनकी धर्मपत्नी, विनोद अग्रवाल, रासेश्वर नाथ मिश्र, मनोरंजन मिश्रा, धीरेंद्र त्रिपाठी रहे। आयोजन को सफल बनाने में मनोज बजाज, प्रदीप वर्मा, राजेश्वर मिश्रा, अजय वर्मा, संतोष कुमार, प्रवीण मंडल, आशीष कुमार सिन्हा आदि का सहयोग रहा।