नौकरी छोड़कर बनाया स्वावलंबी
रांची .
रविवार. २६ जनवरी, २०१४
सूदखोरी में फंसे लोगों को निकाला। युवाओं के रोजगार के लिए प्रयास कर रहे हैं।
चतरा. बिरजू यादव एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर सामाजिक बदलाव के लिए एक अनूठी पहल की है। वे स्वयं सेवी सहायता समूहों का गठन कर युवाओं को रोजगार देने एवं सूदखोरी प्रथा का उन्मूलन कर रहे हैं। मयूरहंड प्रखंड के पंदनी गांव के बिरजू महज एक प्रतिशत के ब्याज पर बेरोजगारों को ऋण देते हैं। इनके ऋण के पैसे से मयूरहंड एवं इसके आसपास के इलाके के दो सौ से अधिक लोग रोजगार शुरू कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं। उनके समूहों से ५०० से अधिक लोग जुड़ें हैं, जो डेयरी, कृषि, पशुपालन, ट्रांसपोर्टिंग, इंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्रों में नाम कमा रहे हैं।
पहाड़ी मंदिर
50 के दशक में पहाड़ी मंदिर और उसके आस-पास हरियाली देखते ही बनती थी। उस समय पहाड़ी के नीचे इक्का-दुक्का ही
घर थे। अब पहाड़ी मंदिर की तलहटी तक घर और अपार्टमेंट बन गए हैं। हरियाली भी कम हो गई है।
वर्गभेद से ऊपर
हम निजी स्वार्थ के लिए अपने महापुरुषों को जाति, धर्म जैसे संकीर्ण दायरे में बांधते जा रहे हैं। यह उनका अपमान है। ऐसे कुत्सित प्रयासों को छोड़कर हमें उनके जीवन और उनके आदर्श से सीख लेनी चाहिए।
स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें।
हमारा कर्तव्य
गौरव का गणतंत्र