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अपने जैसे विकलांगों को कर रहे दक्ष

8 वर्ष पहले
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रांची .

रविवार. २६ जनवरी, २०१४

बचपन से नि:शक्त राजू कुमार अपने जैसे लोगों रोजगार और उनके हक दिलाने में जुटे हैं।



रांची. राजू कुमार बचपन से ही नि:शक्तहै। डेढ़ फीट हाइट है। मगर जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानीं। इंटर के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स का कोर्स कर दुकान खोली, जिसमें 10 लोगों को रोजगार दिया। 2002 में बिरसा विकलांग उत्थान एवं कल्याण समिति का गठन किया। आज संस्थान के माध्यम से हर साल सैकड़ों नि:शक्तों को प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। इनमें से कई आज अच्छी अच्छी कंपनियों में कार्यरत हंै। वर्तमान में 2200 नि:शक्त संस्थान के साथ जुड़ कर प्रदेशभर में काम कर रहे हैं। हाथ और पैर नॉर्मल नहीं होने के बाद भी राजू की आमदनी लाखों में है।

शहीद चौक

शहीद चौक के पास एक बड़ा गोलंबर होता था। इसके सामने एक पुरानी बिल्ंिडग थी, जहां अब टेलीफोन एक्सचेंज है। खादी भंडार उस समय भी था, लेकिन उसका स्वरूप बदला हुआ था। उस समय ज्यादातर लोग साइकिल की सवारी करते थे।

बढ़ा अंधियारा

राज्य के कोने-कोने से डायन-विसाही के मामले रोज अखबारों की सुर्खियां बनते हैं। इस आरोप में लोग नृशंसता से मारे जा रहे हैं। हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर इन बुराइयों पर काबू पाना होगा।

संविधान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद व सुधार की भावना को विकसित करने को कहा गया है।

हमारा कर्तव्य

गौरव का गणतंत्र