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छोटी पूंजी से गांव को किया शिक्षित

8 वर्ष पहले
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रांची .

रविवार. २६ जनवरी, २०१४

लोहरदगा में ललिता जाना पहचाना नाम है। शिक्षा को उनका जीवन समर्पित है।



लोहरदगा. जिले के कैरो प्रखंड अंतर्गत छोटे से गांव नरौली की ललिता मिंज को बचपन में ही पोलियो हो गया था। माता पिता की भी असमय मौत हो गई थी। परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। छोटी उम्र उनकी शादी हो गई। कम शिक्षित थीं, इसलिए परिवार को संभालते हुए जो कुछ पूंजी जमा कर पाई थी, उसे अपने पिछड़े गांव को शिक्षित करने में लगा दिया। शुरुआत में पढ़ाने का उद्देश्य परिवार चलाना था। यह आगे चलकर साक्षरता अभियान में स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में जुड़कर इतना वृहद हो गया कि ललिता का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमक गया। उनका कहना है कि इस काम से उन्हें जो खुशी मिलती है, वो कोई पुरस्कार या काम नहीं दे सकता।

मेन रोड

मेन रोड में इक्का-दुक्का सवारी नजर आती थी। बस स्टैंड सर्जना चौक के पास ही था। कभी-कभार कोई कार नजर आती थी। एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए लोग रिक्शा का इस्तेमाल करते थे। अब ट्रैफिक के कारण लोगों का चलना दूभर हो गया है।

मैली हुई गंगा

गंगा, जिसे देव नदी कहा जाता है, हम उसे भी बुरी तरह से मैली कर रहे हैं। छोटी-छोटी नदियां तो गंदा नाला बन चुकी हैं। तालाबों को भरकर अपार्टमेंट खड़ा करने की होड़ लगी है। इस प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।

प्रकृति व पर्यावरण जैसे नदी, तालाब आदि की रक्षा करना हमारे संवैधानिक कर्तव्य का हिस्सा है।

हमारा कर्तव्य

गौरव का गणतंत्र