नौकरी की जिद छोड़ी, खेतों में जुटे
रांची .
रविवार. २६ जनवरी, २०१४
शिक्षित युवाओं के संकल्प ने पलायन को ना कहा। खेती को बनाया रोजगार।
सिमडेगा. टेट पास कर चुका अनुराग टेटे नौकरी की तलाश में भटक रहा था। उसके दूसरे पढ़े-लिखे साथी भी अपने योग्य काम खोज रहे थे। सिमडेगा प्रखंड के जिला परिषद सदस्य नील जस्टिन बेक ने पलायन रोकने के लिए ऐसे युवाओं को एकजुट किया। असीम ने बैंक की नौकरी छोड़ी और उनके साथ हो गया। सबने मिलकर एक सोसायटी बनाई। युवाओं को आधुनिक खेती के टिप्स दिए और शुरू हो गया मिशन ग्रीन। अब ये अपने खेतों से ही इतना कमा लेते हैं कि अपने परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत बड़ी आसानी से पूरा कर लेते हैं। उनका गांव दूसरों के लिए रोल मॉडल बन गया है।
रतन टॉकीज
1937 में रांची में रतन टॉकीज की स्थापना हुई थी। उस समय सिर्फ इसी हॉल में नई फिल्में लगती थीं। लोग परिवार के साथ नाइट शो में फिल्में देखने आते थे। उस समय भी कार में लोग यहां आते थे। अब रतन टॉकीज की जगह यहां मॉल बन रहा है।
न झुके तिरंगा
स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर कभी काला झंडा तो कभी उलटा तिरंगा फहराना अब नक्सलियों के लिए फैशन बन चुका है। यह तिरंगा नहीं, देश का अपमान है। हमें तिरंगे के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
हमें संविधान के आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए।
हमारा कर्तव्य
गौरव का गणतंत्र