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टेंडर के लिए विवादित पत्र को बनाया आधार

8 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता. रांची
राज्य सरकार ने बच्चों के पोषाहार आपूर्ति में टेंडर व्यवस्था करने के लिए एक विवादित पत्र को आधार बनाया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्कालीन अवर सचिव जतविंदर कौर ने 09 मई 2012 को सभी राज्यों एक पत्र लिखा था, जिसकी गलत व्याख्या कर झारखंड समेत तीन राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के खिलाफ पोषाहार का टेंडर किया। इसी पत्र के आधार पर उत्तरप्रदेश में पोषाहार टेंडर कर खरीदा जा रहा है। छत्तीसगढ़, केरल, ओडि़सा, कर्नाटक समेत 20 राज्यों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार बगैर टेंडर के ही पोषाहार की आपूर्ति हो रही है।
माना जा रहा है कि साजिश के तहत केंद्र के एक अधिकारी ने तथ्य को स्पष्ट ढंग से लिखने की बजाय गोलमटोल बातें लिख दी। इसके आधार पर जिन प्रदेशों में टेंडर हुए, वहां विवाद हो गया। मामला कोर्ट में गया। फिर भी झारखंड सरकार ने टेंडर जारी किया। कैबिनेट ने फैसला करते समय उसी पत्र को आधार बनाया। प्रस्ताव में लिखा था कि केंद्र के इस पत्र के बाद टेक होम राशन की व्यवस्था परिवर्तन करना जरूरी हो गया है।



ञ्चझारखंड समेत तीन राज्यों ने गाइडलाइन के खिलाफ दिया टेंडर

पोषाहार मामला. केंद्र के अधिकारी ने राज्यों को लिखा था पत्र

: आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार आपूर्ति के लिए ठेकेदार का उपयोग नहीं होगा।

: बगैर उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बिना राज्य टेंडर जारी नहीं करें।

: पोषाहार के निर्माण व आपूर्ति के लिए ग्राम समुदाय, स्वयं सहायता समूह एवं महिला मंडलों का उपयोग करें।

: आपूर्ति व्यवस्था का विकेंद्रीकरण हो।

पत्र में अवर सचिव जतविंदर कौर ने सुप्रीम कोर्ट में शगुन महिला मामले ((7104/2011)) का हवाला दिया। इसमें पूरक पोषाहार की आपूर्ति स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल और ग्राम समुदाय के साथ मूल उत्पादनकर्ता से भी लेने की सलाह दी गई थी, लेकिन सरकारों ने मूल उत्पादनकर्ता की ही गलत व्याख्या कर टेंडर निकाला। पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि मूल उत्पादनकर्ता में प्राइवेट उत्पादनकर्ता नहीं माने जाएंगे। यह भी नहीं लिखा गया था कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश के विपरीत प्राइवेट उत्पादनकर्ता से भी पूरक पोषाहार ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

क्या लिखा है पत्र में