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अपना हक पाया, दूसरों के लिए लड़ रहे

8 वर्ष पहले
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रांची .

रविवार. २६ जनवरी, २०१४

न्याय की आस में भटक रहे लोगों को उनका हक दिलाना है एम हक का मकसद।



घाटशिला. हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के इंजीनियर एम हक। अधिकारियों ने साजिश कर उन्हें बर्खास्त कर दिया। जिद की न्याय के लिए लड़ाई लडऩे की। कोर्ट गये, तो लगा काफी समय व पैसे खर्च होंगे। इस बीच लॉ की पढ़ाई की, डिग्री ली और इंजीनियर से वकील बन गये। अपने केस खुद लड़े और जीते भी। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई की वजह से उनका पूरा परिवार बिखर गया। पत्नी ने भी साथ छोड़ दिया। सिर्फ 22 माह की नौकरी के बाद रिटायर हुए।अब वे घाटशिला में ही गरीबों को न्याय दिलाने के लिए नि:शुल्क कानूनी सहायता दे रहे हैं।

अपर बाजार

1937 में अपर बाजार में सिर्फ खपरैल के घर हुआ करते थे। यह तस्वीर रामनवमी जुलूस की है। उस समय अपर बाजार में छोटी-छोटी दुकानें थीं। रांची और आसपास के लोग यहां आकर थोक में सामान खरीदते थे। अब बिल्डिंग और बड़ी दुकानें बन गई हैं।

आसान टार्गेट

हड़ताल, बंदी, प्रदर्शन झारखंड की पहचान बन चुके हैं। ऐसे में सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया जाता है। हमें इनकी देखभाल वैसे ही करनी चाहिए, जैसे हम अपनी निजी संपत्ति की करते हैं।

सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें। यह हमारी संवैधानिक जिम्मेवारी है।

हमारा कर्तव्य

गौरव का गणतंत्र