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मुझे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है। माणिक महतो मेरे पिता और शिबू सोरेन अभिभावक हैं। गुरुजी ने कोई फैसला लिया है, तो उचित ही होगा। मैं तो अब सिर्फ यही चाहती हूं कि पति का श्राद्ध कर्म ठीक से हो। ...

7 वर्ष पहले
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चंदवारा में मुआवजे की मांग को लेकर तीन घंटे जाम



भास्कर संवाददाता. चंदवारा ((कोडरमा))

रांची-पटना रोड पर उरवां के समीप स्कॉर्पियो ने साइकिल सवार दो बच्चों को कुचल दिया। इससे छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसका भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मुआवजे की मांग को लेकर रांची-पटना मार्ग पर जाम लगा दिया। करीब तीन घंटे बाद बीडीओ के आश्वासन पर लोगों ने जाम हटाया। घटना के बाद चालक फरार हो गया। पुलिस को स्कॉर्पियो को जब्त कर लिया है।

जानकारी के अनुसार मध्य विद्यालय उरवां के नौवीं कक्षा के छात्र रेयाज अपनी ममेरी बहन दसवीं की छात्रा नेहा खातून के साथ साइकिल से स्कूल आ रहा था। तभी तेज गति से आ रही स्कॉर्पियो ने साइकिल को अपनी चपेट में ले लिया। इससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने तुरंत दोनों को एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां से उन्हें रांची रेफर कर दिया गया। रांची ले जाने के दौरान हजारीबाग के पास नेहा ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद कई अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल-चाल जाना।





सविता को उम्मीदवार न बनाने से झामुमो में बगावत, विधायक मथुरा महतो, जगन्नाथ महतो व विद्युत वरण महतो ने शिबू को सौंपा इस्तीफा

यह हमारा अपमान है : मथुरा

सविता महतो को उम्मीदवार न बनाए जाने से झामुमो में बगावत हो गई। पार्टी के तीन विधायक मथुरा महतो, जगन्नाथ महतो और विद्युत वरण महतो ने झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को अपने इस्तीफे सौंप दिए। सोमवार को पार्टी की बैठक में इन तीनों ने ही सविता को प्रत्याशी बनाने का प्रस्ताव दिया था। मथुरा महतो ने कहा कि यह हमारा अपमान है। कहा है कि अगर गुरुजी ने हमारा इस्तीफा विस अध्यक्ष को नहीं सौंपा, तो हम खुद उनके पास जाएंगे।

भास्कर संवाददाता - रांची/जमशेदपुर

राजद की सरकार से समर्थन वापसी की धमकी के बाद मंगलवार को झामुमो और कांग्रेस बैकफुट पर आ गए। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने आलमगीर आलम और झामुमो ने दिवंगत सुधीर महतो की पत्नी सविता महतो को नामांकन नहीं कराया। राजद के बाहरी प्रत्याशी प्रेमचंद गुप्ता को समर्थन की घोषणा कर दी। झामुमो ने सविता महतो को रांची बुलाकर खाली हाथ लौटा दिया। वे रोते हुए जमशेदपुर लौट गईं। स्थानीयता की दुहाई देने वाले नेताओं ने बाहरी के लिए सविता के आंसुओं की परवाह भी नहीं की।

इससे पहले मंगलवार सुबह राजद की कमान संभालते हुए अन्नपूर्णा देवी ने कांग्रेस और झामुमो को अपने पाले में करने के लिए सीएम हेमंत सोरेन और कांग्रेसी मंत्री राजेंद्र सिंह के साथ बैठकें की। उन्होंने फोन पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की बात इन नेताओं से कराई। लालू से बातचीत के बाद हेमंत और राजेंद्र ने प्रेमचंद गुप्ता को समर्थन देने पर अपनी सहमति दे दी। गुरुजी ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी।

सोमवार को दिल्ली में राहुल गांधी के साथ लालू प्रसाद की मुलाकात के बाद यह लगभग तय हो गया था कि बिहार और झारखंड में लोकसभा सीटों के बंटवारे पर कोई ठोस निर्णय हुआ है। राजद इस राज्यसभा सीट के बदले झारखंड में लोकसभा की एक सीट छोडऩे को तैयार हो गया है।

यूपीए फोल्डर को दोनों सीटों पर जीतने से रोका। लोकसभा में काम आएगा समीकरण।

लोकसभा की एक सीट पर राजद ने कांग्रेस के लिए दावेदारी छोड़ी। बिहार में भी ज्यादा सीटें।

केडी सिंह के इस्तीफे से खाली राज्यसभा सीट पर कांग्रेस-राजद के समर्थन का आश्वासन

भाजपा-आजसू का फायदा

कांग्रेस को क्या हासिल

तो झामुमो को क्या मिला

फोटो : माणिक बोस

84.46 करोड़

चल : त्र3 करोड़ 78 लाख 83 हजार 555

अचल : त्र9 करोड़ 80 लाख

चल : त्र3 करोड़ 89 लाख पांच हजार 857 अचल : त्र15 करोड़ 25 लाख

चल : त्र49 करोड़ 47 लाख 89 हजार 912 अचल : त्र 22 करोड़ 60 लाख

चल : त्र6 करोड़, 26 लाख, 77 हजार 568 अचल : त्र 3 करोड़ 86 लाख

चल : त्र92 लाख 72 हजार 867

अचल : त्र8 करोड़ 60 लाख 50 हजार

परिमल नथवाणी



प्रेमचंद गुप्ता

कुल संपत्ति

कुल संपत्ति

पुत्र धनराज

पत्नी वर्षा

पत्नी सरला गुप्ता

त्र19.66 करोड़

2004 : यशवंत सिन्हा, स्टीफन मरांडी 2006 : माबेल रीबेलो, एसएस आहलुवालिया



एसएस आहलुवालिया 2000, 06

आरके आनंद 2000

देवदास आप्टे 2002

माबेल रीबेलो 2006

केडी सिंह 2010

परीमल नथवाणी 2008

ये गए थे राज्यसभा

दोनों प्रत्याशी करोड़पति

>मैदान में तीसरा प्रत्याशी न होने से मतदान की आवश्यकता नहीं

नथवाणी-गुप्ता की जीत तय

भास्कर संवाददाता - रांची

झारखंड से एक बार फिर बाहरी उम्मीदवार राज्यसभा जाएंगे। भाजपा-आजसू समर्थित निर्दलीय परिमल नथवाणी और राजद के प्रेमचंद गुप्ता का राज्यसभा सांसद बनना लगभग तय हो गया है। दोनों करोड़पति उम्मीदवारों ने राज्य की दो सीटों के लिए मंगलवार को अपना पर्चा भरा। अगर दोनों का पर्चा सही रहा तो 31 जनवरी को ये निर्विरोध निर्वाचित

हो जाएंगे।

नथवाणी को निर्दलीय उतारने पर अड़ी थी भाजपा

परिमल नथवाणी पहले आजसू का उम्मीदवार बनना चाहते थे। आजसू इसके लिए राजी था। लेकिन भाजपा को आपत्ति थी कि छह विधायकों वाले दल के उम्मीदवार को 18 विधायकों वाली पार्टी कैसे समर्थन देगी। भाजपा अंतिम समय तक अपनी बात पर अड़ी रही। अंतत: नथवाणी को निर्दलीय प्रत्याशी बनवा कर वह अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल हुई।



हमारे पास आंकड़े नहीं थे, इसलिए उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। राजद की धमकी के कारण फैसला नहीं बदला। न कोई थ्रेट था और न कोई दे सकता है। स्थानीयता की बात करने वाले बदल गए। हेमंत सोरेन

स्थानीयता की बात करने वाले बदल गए



बाहरी के लिए अपनों को नहीं दिखे सविता के आंसू

ये चुने गए थे निर्विरोध

बाहरियों का बोलबाला

झामुमो समर्थन के लिए हमसे बात करता। हम आंदोलनकारी परिवार की महिला को समर्थन देते। झामुमो को शर्म आ रही थी तो वे मीडिया के जरिए सपोर्ट मांगते। ’’ बाबूलाल मरांडी

झामुमो कहता तो हम सविता को देते समर्थन



राज्यसभा चुनाव - झामुमो-कांग्रेस ने बिहार के प्रेमचंद, आजसू-भाजपा ने गुजरात के नथवाणी को चुना