राज्यसभा चुनाव की खबरें: राजकाज के लिए
रांची - चार सेट में दाखिल प्रेमचंद गुप्ता के नामांकन पत्र में कांग्रेस की ओर से मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह, मन्नान मल्लिक, गीताश्री उरांव, विधायक बन्ना गुप्ता, अनंत प्रताप देव, सौरभ नारायण सिंह और राजद की ओर से मंत्री अन्नापूर्णा देवी, सुरेश पासवान, विधायक संजय कुमार यादव, संजय प्रसाद यादव प्रस्तावक बने हैं। दो सेट में कांग्रेस के सरफराज अहमद का भी हस्ताक्षर है।
धर्मनिरपेक्ष ताकतें मिलकर लड़ेंगी : प्रेमचंद गुप्ता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में नामांकन पत्र दाखिल करते प्रेमचंद गुप्ता।
विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते परिमल नथवाणी।
भास्कर संवाददाता - रांची
झारखंड में दो सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में इस बार फिर बाहरियों के सिर ताज सजेगा। दोनों प्रत्याशी परिमल नथवाणी व प्रेमंचद गुप्ता स्थानीय नहीं हैं। वहीं इस चुनाव में छोटे दलों की ही चली। परिमल आजसू के उम्मीदवार बनना चाहते थे। आजसू भी इसके लिए अंतिम समय तक अड़ा रहा। आजसू नेता चाहते थे कि भाजपा उसे समर्थन करे। जबकि आजसू के छह और भाजपा के 18 विधायक हैं। भाजपा के गले यह बात उतरी नहीं। अंतत: नथवाणी को निर्दलीय प्रत्याशी बनवा कर वह अपनी प्रतिष्ठा बचा पाने में सफल हुई। वहीं झामुमो द्वारा सविता को उम्मीदवार नहीं बनाने से भी भाजपा को राहत मिल गई। नहीं तो उसे फजीहत झेलनी पड़ सकती थी।
इधर, पांच विधायकों के बल पर राजद अपने प्रत्याशी प्रेमचंद गुप्ता को कांग्रेस का समर्थन दिलाने में सफल रहा। हालांकि झामुमो ने पूर्व डिप्टी सीएम सुधीर महतो की विधवा सविता महतो को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उसे कांग्रेस का समर्थन नहीं मिल सका। अंतत: उनका पत्ता कट गया। इससे नाराज पार्टी के कुछ विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है।
राज्यसभा चुनाव - नथवाणी को भाजपा व आजसू का, जबकि प्रेमचंद के समर्थन में कांग्रेस व राजद
नथवाणी के हैं दस प्रस्तावक
भाजपा की ओर से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे विधायक सीपी सिंह, रामचंद्र बैठा, हरेकृष्ण सिंह, अमित कुमार यादव, लक्ष्मण गिलुआ एवं सत्यानंद झा तथा आजसू की ओर से चंद्र प्रकाश चौधरी, उमाकांत रजक, नवीन जायसवाल, रामचंद्र सहीस नथवाणी के प्रस्तावक बने हैं।
विशेष राज्य बनाने की होगी कोशिश
नामांकन दाखिल करने के बाद परिमल नथवाणी ने कहा कि छह साल में उन्होंने राज्य के लिए जो काम किया, उसे यहां की जनता और विधायक सभी जानते हैं। उन्होंने यहां झारखंडी बन कर काम किया। इसीलिए आजसू और भाजपा का उन्हें समर्थन मिला। अब वह युवा झारखंड को विशेष बनाने का प्रयास करेंगे।
ऐसे किया परिमल नथवाणी ने नामांकन
नथवाणी लगभग 10 बजे प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचे। लगभग 11.30 बजे नथवाणी भाजपा विधायकों के साथ भाजपा मुख्यालय से विधानसभा रवाना हुए। वहां लगभग 11.40 बजे पहुंचे। भाजपा व आजसू विधायकों के साथ नथवाणी ने नामांकन दाखिल किया। फिर वहां से वे भाजपा मुख्यालय पहुंचे। एक घंटे तक पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बात करने के बाद चले गए।
लालू का मतलब है यूपीए
॥लालू प्रसाद मतलब यूपीए है। प्रेमचंद गुप्ता लालू प्रसाद के और यूपीए के प्रत्याशी हैं। सुधीर महतो की पत्नी सविता महतो के साथ हमलोग हैं। राज्यसभा-लोकसभा जहां जाना चाहेंगी, हमलोग जीताकर भेजेंगे। फिलहाल बोर्ड निगम का अध्यक्ष भी बनवा देंगे। केडी सिंह झामुमो से राज्यसभा गए थे। वह सीट खाली होने पर झामुमो उम्मीदवार को मिलेगा। यह पूछे जाने पर कि आलमगीर आलम को कांग्रेस ने पहले क्यों प्रत्याशी बनाया था, उन्होंने कहा कि हमलोगों की यह चुनावी रणनीति थी।ञ्जञ्ज
राजेंद्र सिंह, मंत्री
कार्य को देख समर्थन दिया
॥भाजपा और आजसू दोनों ने परिमल नथवाणी के लिए कोशिश की है। झारखंड के लिए नथवाणी ने बहुत काम किया है। उनके झारखंड में किए गए पिछले कार्यों को देखते हुए ही हमलोगों ने इन्हें समर्थन दिया है। वे आगे भी झारखंड के लिए काम करेंगे।ञ्जञ्ज
चंद्र प्रकाश चौधरी, आजसू
नथवाणी ने कई काम किए हैं
॥परिमल नथवाणी ने छह साल में स्थानीय स्तर पर बहुत काम किया है। इन्होंने झारखंड की जनता और यहां के लोगों के हित में भी काफी काम किया है। वैसे राज्यसभा चुनाव में वोट करने की नौबत आती तो भाजपा के 18 और आजसू के 06 विधायक इनको ही वोट करते। हॉर्स ट्रेडिंग की कोई बात नहीं है। परिमल नथवाणी के बी हाफ में मैं कह रहा हूं कि इन्होंने जनता के हित में काम किया है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी इनके साथ आया है।ञ्जञ्ज
सीपी सिंह, भाजपा
राजद का हक बनता था
॥इस राज्यसभा चुनाव में राजद का हक बनता था। प्रेमचंद गुप्ता को लेकर कोई बाहरी-भीतरी की बात नहीं थी। वे पार्टी के नेता हैं। स्थानीय स्तर पर हमेशा खड़ा रहते हैं। आगे भी रहेंगे। कोई सवाल आने पर राजद हरदम कांग्रेस और झामुमो के साथ रहेगा। इसीलिए राजद ने प्रेमचंद गुप्ता को झारखंड से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।ञ्जञ्ज
अन्नापूर्णा देवी, मंत्री
आलमगीर अधिकृत प्रत्याशी नहीं थे : भगत
कुल दस हैं प्रेमचंद के प्रस्तावक