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- दस बाल मजदूर मुक्त बाल गृह भेजे गएमुजफ्फरपुर ! रेल पुलिस व चाइल्ड लाईन संस्था के सहयोग से शुक्रवा
दस बाल मजदूर मुक्त बाल गृह भेजे गएमुजफ्फरपुर -!- रेल पुलिस व चाइल्ड लाईन संस्था के सहयोग से शुक्रवार शाम स्थानीय रेलवे स्टेशन से दस बाल मजदूरों को मुक्त करा लिया गया। सभी बच्चे दिल्ली के बैग...
भास्कर न्यूज - पटना
पिछले दो लोकसभा चुनावों में बिहार से किसी भी वाम दलों का खाता नहीं खुल सका है। भाकपा, माकपा और भाकपा माले को आगामी लोकसभा चुनाव में एक अदद सीट की दरकार है। 2009 की लोकसभा चुनाव में जीत तो दूर, मुकाबले में भी कहीं वामदलों के उम्मीदवार नहीं रहे। एकमात्र बेगूसराय सीट पर भाकपा के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। वामदलों के उम्मीदवार अधिकांश जगहों पर चौथे स्थान पर रहे।
कभी भाकपा का राज्य में 6-7 लोस सीटों परचम लहराया करता था। धीरे-धीरे पार्टी का जनाधार सिमटता गया। 1971 में 7, 1980 में 6, 1984 में 2, 1984 में 2, 1989 में 4, 1991 में 7 और 1996 में 4 सीटों पर जीत मिली थी। 1998, 1999, 2004 व 2009 में खाता नहीं खुल सका। 1999 की लोकसभा चुनाव में माकपा के सुबोध राय को जीत मिली थी। इसके पहले माकपा दो बार नवादा सीट जीत चुकी थी। भाकपा माले के रामेश्वर प्रसाद को 1989 इंडियन पीपुल्स फ्रंट के बैनर से लोस पहुंचे थे।
2009 के लोस चुनाव में भाकपा, माकपा व भाकपा माले ने संयुक्त उम्मीदवार मैदान में उतारा था। 2014 के चुनाव के लिए भाकपा वाम एकता के साथ ही जदयू से समझौता करने के मूड में है। वहीं भाकपा माले का राजद की ओर रुझान है। हालांकि भाकपा माले ने साफ कर दिया है कि राजद का कांग्रेस से तालमेल होने की स्थिति में राजद से कोई बात नहीं हो सकती है। भाकपा के पूर्व राज्य सचिव बद्री नारायण लाल ने बताया कि कांग्रेस और भाजपा से दूरी रखने वाले जनवादी पार्टियों के साथ बात हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस को केंद्र की सत्ता से दूर रखने के लिए अन्य दलों को साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए।
माकपा के राज्य सचिव विजय कांत ठाकुर ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस से अलग रहने वाली पार्टियों के साथ तालमेल किया जा सकता है। भाकपा वामदलों की एकता भी बनाए रखने के पक्ष में है। भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस ही नहीं जदयू के साथ तालमेल रखने वाले किसी पार्टी के माले की साथ दोस्ती का सवाल ही नहीं है।