बंजर भूमि को बनाया हरा-भरा
लातेहार. सदर प्रखंड के ललगड़ी गांव में बंजर वन भूमि पर घास भी नहीं उगती थी। ऊबड़-खाबड़ पथरीली भूमि बेकार साबित हो रही थी। तब 54 वर्षीय रामेश्वर सिंह खरवार ने ग्रामीणों के साथ मिल-बैठकर नई तकनीक से इस जमीन पर पेड़ लगाने की ठानी। 2004-05 में ग्रामीणों ने वन समिति बनाकर इस भूमि पर शीशम, सिरीस, गम्हार, खैर, बांस और महुआ के 83 हजार पौधे लगाए। आज ये पौधे 15 से 20 फीट लंबे हो गए हैं। सिंह बताते हैं कि रांची वन विभाग की टीम ने जब इस प्लांटेशन का निरीक्षण किया था तो लगभग 80 प्रतिशत पौधे स्वस्थ पाए गए। वन समिति के अध्यक्ष के नाते रामेश्वर को पुरस्कृत किया गया। आज भी वे इसी काम में जुटे हैं।
रामेश्वर सिंह बंजर भूमि को हराभरा करने के मिशन में जुटे हैं। यही उनका उद्देश्य है।
पूजनीय है नारी
हमारा देश आदिकाल से नारियों को पूजनीय मानता रहा है। लेकिन, हाल के वर्षों में नारी और बच्चियों के साथ घटी घटनाएं बताती हैं कि हम अपने इस संवैधानिक कर्तव्य से भी विमुख हो रहे हैं। यह विचारणीय है।
संविधान कहता है कि हम ऐसी प्रथाओं का त्याग करें, जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो।
हमारा कर्तव्य
गौरव का गणतंत्र
टैगोर हिल
रवींद्रनाथ टैगोर के भाई ज्योतिंद्रनाथ टैगोर के नाम पर टैगोर हिल का नाम पड़ा। यहां वह घंटों बैठते थे। 50 के दशक में वहां टूटी-फूटी सीढिय़ों वाला एक निर्माण था। चारों तरफ जंगली झाडिय़ां और पेड़ थे। अब इस स्थल पर कई निर्माण कराए गए हैं।
रांची .
रविवार. २६ जनवरी, २०१४