पांच बाल श्रमिक मुक्त
भास्कर न्यूज - मेदिनीनगर
मनातू थाना के बंसी गांव के पांच बच्चों को श्रम विभाग द्वारा जयपुर से मुक्त कराकर लाया गया। सोमवार को बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
मनातू थाना क्षेत्र के बंशी गांव में गरीबी का दंश झेल रहे पांच बच्चे विगत डेढ़ वर्षों से जयपुर स्थित एक चूड़ी फैक्ट्री में बंधुआ मजदूर के रूप में कार्य कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि एक बच्चे के पिता की शिकायत पर जयपुर पुलिस हरकत में आई। जयपुर के सी738 बिलाल मस्जिद, भट्टा बस्ती ((शास्त्री नगर)) स्थित अफजल खान की चूड़ी फैक्टरी पर छापामारी कर दस बच्चों को मुक्त कराया। बच्चों को मुक्त कराने के बाद पंाच बच्चों को जयपुर स्थित किशोर गृह तथा पांच बच्चों को तावर नामक संस्थान में रखा गया। इसके उपरांत राजस्थान बाल संरक्षण अभियान के सचिव ने इसकी सूचना झारखंड के संयुक्त श्रमायुक्त अजीत कुमार पन्ना को दी। टीम में गढ़वा जिला के नगरऊंटारी के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुनील कुमार, बालूमाथ के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी रविन्द्रनाथ व लातेहार के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बसंत कुमार महतो शामिल थे।
निरीक्षण में बंद मिला हेल्थ सेंटर
बच्चों ने कहा-ठीक से खाना भी नहीं मिलता था
मुक्त कराए गए बंशी गांव के मो रईश खां के 12 वर्षीय पुत्र मो. जमील खान ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सरईडीह गांव के भोला खान के साथ वह जयपुर गया था। भोला खान ने हमारे पिता को काम के बदले अच्छे पैसे देने व आराम से काम करने की बात कही थी। लेकिन जब वह जयपुर गया तो उसे चूड़ी बनाने के काम पर लगा दिया गया। काम के बदले न तो उसे पैसे दिए जा रहे थे और न ही उसे घर जाने दिया जा रहा था। कुछ दिन पूर्व जब जमील के पिता उसे लेने जयपुर गए तो उनसे बंधुआ मजदूरी करवाने वालों ने साथ मारपीट की। इसके बाद जमील के पिता मो रईश खान ने थाना में शिकायत दर्ज कराई। इसी तरह, बंशी गांव के ही पंकज कुमार भुइयां ((14 वर्ष)), गोविंदा भुइयां ((8 वर्ष)), अरविंद कुमार भुइयां ((12 वर्ष)) और कंचन कुमार गुप्ता ((१3 वर्ष)) ने कहा कि उनसे 15 से 18 घंटे तक काम कराया जाता था। न तो ठीक से खाना दिया जाता था और न ही सोने।
जयपुर की चूड़ी फैक्ट्री में काम करते थे, बच्चों को परिजनों को सौंपा