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दस पार्षद गए छुट्टी पर नपं की बैठक पर संशय
भास्कर न्यूज। गुमला
गुमला नगर पंचायत के बोर्ड की बैठक 29 जनवरी को रखी गई है। इस बैठक में शहर के विकास, होल्डिंग और वाटर टैक्स पर चर्चा होनी है, लेकिन नगर पंचायत के दस वार्ड पार्षदों के छुट्टी पर चले जाने से बैठक पर संशय है। दस पार्षदों ने नपं के कार्यपालक पदाधिकारी राजीव रंजन मुंडा को ज्ञापन
सौंपा है।
ज्ञापन में कहा है कि निजी कार्य से 28 जनवरी से लेकर दो फरवरी तक सभी छ़ु़ट्टी पर रहेंगे। इस दौरान वे गुमला नगर पंचायत के किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकेंगे। इधर नगर पंचायत की उपाध्यक्ष मोसर्रत परवीन ने पत्र जारी कर 29 जनवरी की बैठक में सभी पार्षदों से उपस्थित होने की अपील की है। बैठक में भाग लेने संबंधी पत्र सभी पार्षदों को सौंपा गया है। गुमला नगर पंचायत में 20 वार्ड पार्षद हैं। उपाध्यक्ष ने कहा है कि सभी पार्षद गुमला में हैं। जानबूझकर वार्ड पार्षद बैठक में भाग नहीं लेना चाहते हैं। उनकी मंशा विकास की योजनाओं को बाधित करने की है। लंबे समय से टैक्स का मुद्दा चल रहा है। लोग इसे कम करने की मांग कर रहे हैं। अगर बैठक होती तो टैक्स को कम करने पर मुहर लग सकती थी।
इन वार्ड पार्षदों ने सौंपा है ज्ञापन
जिन वार्ड पार्षदों ने नपं अधिकारी को ज्ञापन सौंपा उनमें मुमताज, अनिल यादव, योगेंद्र प्रसाद, संजीदा खातून, गायत्री शर्मा, सानू बहादुर, हेमलता देवी, ललिता देवी, शैल मिश्रा और अध्यक्ष धीरेंद्र प्रसाद सिंह हैं।
मामले के पीछे की राजनीति
गुमला - जाति प्रमाण पत्र प्रकरण के बाद नपं अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह का वित्तीय अधिकार छिन गया है। इसके बाद नपं का पूरा अधिकार उपाध्यक्ष मोसर्रत परवीन को मिल गया। इसलिए योजनाओं के चयन और बिल भुगतान को लेकर नपं प्रतिनिधियों में गुटबाजी शुरू हो गई। नौ वार्ड पार्षद धीरेंद्र के साथ हैं। जबकि दस पार्षद मोसर्रत के साथ हैं। इधर धीरेंद्र खेमे के लोग मोसर्रत को उपाध्यक्ष की कुर्सी से हटाने की योजना बना रहे हैं। इसलिए बोर्ड की बैठक को फ्लॉप किया जा रहा है। इससे पहले भी बोर्ड की बैठक महज औपचारिकता बनकर रह गई थी। इस बार भी ऐसा ही करने का इरादा है।