कुड़ूख भाषा का संरक्षण जरूरी : बॉबी भगत
भास्कर न्यूज - गुमला
उरांव सरना क्लब दुंदुरिया गुमला में कुड़ूख भाषा लिपि दिवस ((तोलोंग सिकीउल्ला)) को लेकर मंगलवार को बैठक हुई। मौके पर 20 फरवरी को कुड़ूख भाषा लिपि दिवस
मनाने पर विचार-विमर्श
किया गया।
घाघरा प्रखंड की जिला परिषद सदस्य बॉबी भगत ने कहा कि किसी भी समाज के इतिहास एवं विकास की कहानी उस समाज के भाषा साहित्य से मिलती है। परंतु आदिवासी समाज में चलना ही संगीत और बोलना ही गीत है। प्रोफेसर बेरनार्ड मिंज ने कहा कि डॉक्टर नारायण उरांव सैंदा द्वारा तोलोंग सिकी का अविष्कार किया गया। अब इसे सरकारी मान्यता भी मिल चुकी है। तोलोंग सिकी को कुड़ूख लिपि के रूप में सरकार ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि आज हमें कुड़ूख भाषा, संस्कृति के संरक्षण एवं संवद्र्धन के लिए आगे आना होगा। इसके लिए आज की युवा पीढ़ी को अहम भूमिका निभानी होगी। बैठक में विनोद भगत, रामावतार भगत, चंद्रावती लकड़ा, उत्तम उरांव, जूलियस कुल्लू, सुशील, मंगलेश्वर उरांव, विश्वनाथ उरांव, संतोष उरांव, जयमनी कुमारी, राशि कुजूर, योगेंद्र भगत, रामलाल उरांव सहित कई लोग थे।