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पांच साल बाद भी प्रभारियों के भरोसे गिद्दी प्रखंड
भास्कर न्यूज - गिद्दी
करोड़ों की लागत से बने डाड़ी प्रखंड भवन में काम-काज तो शुरू हो गया लेकिन पांच साल बाद भी प्रभारियों के भरोसे डाड़ी प्रखंड चल रहा है । पांच सालों में अब तक कई ऐसे पद हैं, जो सृजित नहीं किए गए हैं। इससे प्रखंड के विकास पर काफी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों को खास तो क्या साधारण कार्य कराने में भी महीनों लग जा रहे हैं। डाड़ी प्रखंड का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने 18 नवंबर 2008 को किया था। तब से अधिकारियों की कमी हमेशा से यहां रही है। कभी अंचलाधिकारी बीडीओ के प्रभार में तो, कभी बीडीओ अंचलाधिकारी के प्रभार में रह रहे हैं। वर्तमान में भी बीडीओ सुधीर प्रकाश के पास अंचलाधिकारी का भी प्रभार है। इसी तरह प्रखंड में शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, कृषि पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी, विक्रय पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पद भी प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। प्रभारियों के भरोसे विभाग चलने के कारण प्रभारी भी प्रखंड कार्यालय में पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। यही हाल कर्मचारियों का भी है। चुरचू प्रखंड के कई कर्मचारियों के जिम्मे आज भी डाड़ी प्रखंड का कार्यभार है।
अविलंब हो पदस्थापना : राकेश सिंह
डाड़ी प्रखंड मुखिया संघ के सचिव राकेश सिंह का कहना है कि डाड़ी प्रखंड में सरकार अविलंब पद सृजित कर अधिकारियों की पदस्थापना करे। ताकि विकास की गति में तेजी आ सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में डाड़ी प्रखंड के अधिकारी व कर्मचारी हजारीबाग से आते हैं। जिससे भी विकास में बाधा पहुंच रही है। पदस्थापना हो जाने से सभी पदाधिकारी प्रखंड मुख्यालय के बगल में स्थित बीडीओ, सीओ तथा कर्मियों के बने आवास में रहेंगे। जिससे ग्रामीणों को फायदा होगा।
पद सृजित हो जाने से प्रखंड का होगा विकास : बीडीओ
डाड़ी बीडीओ सुधीर प्रकाश ने कहा कि पद सृजित हो जाने से प्रखंड का विकास होगा। इसके लिए संबंधित विभाग को जानकारी दे दी गई है। पदाधिकारी की पदस्थापना हो जाने से काम करना भी आसान हो जाएगा और ग्रामीणों को भी लाभ होगा।
अधिकारियों के
पदस्थापना के लिए उठी मांग
पूर्ण रूप से पद सृजित कर अधिकारियों की पदस्थापना के लिए जनता दरबार में भी ग्रामीणों ने उठाई थी मांग। मांग पर हजारीबाग जिला भू अर्जन पदाधिकारी बंका राम ने ग्रामीणों की मांग को पूरा करने के लिए संबंधित उच्च पदाधिकारियों से बात कर पदस्थापना कराने के लिए आश्वासन दिया था। लेकिन छह माह गुजर जाने के बाद भी अभी तक ज्यों की त्यों व्यवस्था बनी हुई है।