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केस स्टडी

7 वर्ष पहले
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नामकुम निवासी सुरेंद्र ठाकुर ((बदला हुआ नाम)) 15 साल की उम्र में मोटरसाइकिल चोरी करते हुए पकड़ा गया था। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने बिना उसकी उम्र जांच किए ही उसे जेल भेज दिया। जेल में अपराधियों से जान पहचान होने के बाद वह अपराध की दुनिया में खुलकर सक्रिय हो गया। दर्जनों डकैती और लूटपाट के कारण पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया था। तीन साल पहले नामकुम करमटोली के पास किसी ने उसकी हत्या कर दी।



हिंदपीढ़ी के रहने वाला गुलफ़ाम ((बदला हुआ नाम)) ने 10 साल की उम्र में ही हरमू बाइपास में लूटपाट की। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेजा। दोबारा फिर लूटपाट के आरोप में गिरफ्तार होने पर उसे जेल भेज दिया गया। उस वक्त उसकी उम्र महज 16 साल थी। जेल में बंद बड़े अपराधियों से सांठगांठ हो गई। अभी 19 साल का है, मर्डर और डकैती के मामले में पुलिस तलाश रही है।

राजधानी के धुर्वा इलाके में रहने वाला धुर्वा का सूरज कुमार ((बदला हुआ नाम)) 15 साल की उम्र में मारपीट के कारण गिरफ्तार हुआ था। लेकिन पुलिस द्वारा उसे बाल सुधार गृह भेजने की जगह जेल भेज दिया गया। जेल में उसकी जान पहचान बड़े अपराधियों से हो गई। इसके बाद वह लूट, मर्डर और रंगदारी जैसे अपराधों से जुड़ गया। बीते वर्ष अपराधियों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।



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