एक लिपिक की तीन जन्मतिथि से परेशानी
भास्कर न्यूज - गिरिडीह
जमुआ प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित एक लिपिक की तीन जन्मतिथि है। शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, समाहरणालय स्थित सहायक संवर्ग की वरीयता सूची व सर्विस पुस्तिका में अलग-अलग जन्मतिथि अंकित होने से प्रशासन असमंजस में पड़ गया है।
लेकिन सही जन्मतिथि क्या है यह तय करने में अधिकारियों को भारी माथा पच्ची हो रही है। सदर अनुमंडल पदाधिकारी जुल्फीकार अली ने भी इस मामले में गहन जांच पड़ताल की। लेकिन कोई परिणाम सामने नहीं आया। जबकि सर्विस बुक में अंकित जन्मतिथि के अनुसार लिपिक शक्ति प्रसाद सिंह 31.01.2014 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वे फिलहाल जमुआ प्रखंड कार्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत हैं। इस मामले में अब आम आदमी पार्टी ने शासन-प्रशासन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उपायुक्त गिरिडीह, लोकायुक्त रांची व पुलिस महानिदेशक निगरानी ब्यूरो से मामले के जांच की मांग की है। आप सदस्य दीपक लाल ने आरोप लगाया है कि गिरिडीह जिले में सर्टिफिकेट फर्जीवाड़ा का एक बड़ा खेल चल रहा है। लेकिन ऐसे मामलों के खुलासे के बाद जिला प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। आम आदमी पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। सही जांच व कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
आरोप बकवास है। सर्विस बुक में जन्म तिथि 01.02.1954 है, जो सही है। उसी के तहत सहायक शक्ति प्रसाद सिंह 31.01.2014 को नौकरी का 60 साल पूरा कर रहे हैं और सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं। विकास कुमार राय, बीडीओ, जमुआ।
आरोप बकवास है : बीडीओ
कहां है संदेह
शक्ति प्रसाद सिंह पिता लीलो सिंह ने लंगटा बाबा हाईस्कूल मिर्जागंज में से मैट्रिक पास की। जिसमें स्कूल से निर्गत एसएलसी में अंकित जन्मतिथि 01.02.1948 है। न्यू बरगंडा प्रोफेसर कॉलोनी के रामानंद मधुकर को आरटीआई के तहत 02.05.2013 को लंगटा बाबा हाई स्कूल के प्रिंसिपल ने लिखित सूचना दी है कि शक्ति प्रसाद सिंह ने 1966 में मैट्रिक पास किया और नामांकन पंजी के अनुसार उनकी जन्मतिथि 01.02.1948 है। लेकिन गिरिडीह समाहरणालय के सहायक संवर्ग की वरीयता सूची के क्रम संख्या 151 में शक्ति प्रसाद सिंह की जन्मतिथि 12.07.1951 व नियुक्ति तिथि 01.10.2003 है। जबकि सर्विस पुस्तिका में जन्मतिथि 01.02.1954 है। जिसके तहत 31.01.2014 को उनकी आयु 60 वर्ष हो रही है और वे सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लेकिन सही जन्मतिथि क्या है कि यह जांच में भी खुलासा नहीं हो पाया है। लिहाजा संदेह बना हुआ है।
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