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सिंचाई परियोजना की असलियत का खुलासा

8 वर्ष पहले
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: पानी के लिए पानी की तरह बहा सरकारी पैसा, पर नहीं मिल सका पानी
भास्कर न्यूज - मिर्जागंज
जमुआ प्रखंड के धुरैता और फतहा पंचायत की ठीक सीमा पर बहने वाली उसरी नदी पर वर्ष 1980 में भालको अब झालको द्वारा उद्वह सिंचाई योजना के तहत लगाया गया संयंत्र पूरी तरह बेकार साबित हो रहा है। सैकड़ों एकड़ जमीन को सिंचित करने के दावे के साथ करीब 20 लाख रुपए की लागत से स्थापित किया गया संयंत्र इलाके की एक इंच जमीन को भी पानी सिंचित करने में विफल साबित हुआ है। फिलवक्त उक्त सिंचाई संयंत्र के कीमती उपस्कर या तो रख-रखाव के अभाव में सड़ गए या फिर कथित तौर पर चोरी चले गए। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार एकीकृत बिहार में पठारी क्षेत्रों को सिंचाई की वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने के लिए उद्वह सिंचाई योजना का संचालन किया गया। योजना के तहत ही उक्त स्थल पर सिंचाई संयंत्र स्थापित किए गए। नदी किनारे कुआं खोदकर उच्च क्षमता के मोटरों द्वारा पाइप के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई। जानकार बताते हैं कि सिंचाई संयंत्र के संचालन के लिए यहां पम्प ऑपरेटर और चौकीदार समेत किसानों से जल कर वसूलने के लिए कर्मचारी की भी नियुक्ति की गई। इतना सब होने के बाद भी स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हो सका। पंसस उर्मिला देवी का मानना है कि अगर सरकार उक्त सिंचाई संयंत्र को पुन: संचालित करने में दिलचस्पी दिखाए तब प्राय: बंजर रहने वाली जमीन में हरियाली आ सकती है।